वैश्विक स्तर पर पिछले एक महीने में कोरोना के मामलों पर नजर डालें तो पता चलता है कि नया JN.1 सब-वैरिएंट स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी मुश्किलें बढ़ा रहा है। चीन, सिंगापुर, यूएस-यूके सहित कई देश इसकी गंभीर चपेट में हैं, भारत में भी एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 761 नए मामलों की पुष्टि की गई है, इसके साथ अब एक्टिव केस भी बढ़कर 4400 से अधिक हो गए हैं।
Covid-19: इस देश में कोरोना की एक और लहर! मास्क हुआ अनिवार्य, विशेषज्ञों ने इस बड़े खतरे को लेकर किया सावधान
अमेरिका के कई स्टेट्स में मास्क फिर से अनिवार्य
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड-19, मौसमी फ्लू और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में वृद्धि के बीच अमेरिका के कई स्टेट्स के अस्पतालों ने मास्क को फिर से अनिवार्य कर दिया गया है। न्यूयॉर्क शहर के स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. अश्विन वासन ने मीडिया को बताया कि शहर के सभी 11 सार्वजनिक अस्पतालों, 30 स्वास्थ्य केंद्रों सहित क्लीनिक्स में फिर से लोगों के लिए मास्क को अनिवार्य किया गया है।
कोरोना के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को सुरक्षित हो जाने की आवश्यकता है। भले ही ज्यादातर संक्रमितों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं फिर भी कोरोना के कारण होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों का जोखिम हो सकता है।
भारत में कैसी है स्थिति?
भारत में संक्रमण की स्थिति पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहां पिछले दो दिनों से लगातार 700 से अधिक नए मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। करीब 12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के नए वैरिएंट की पुष्टि की जा चुकी है। ओडिशा में कोरोना के नए वैरिएंट के दो नए केस सामने आए हैं। केरल और कर्नाटक में अब भी कोरोना के सबसे ज्यादा संक्रमित हैं। हाल ही में कोरोना संक्रमितों में दो नए लक्षण- नींद की समस्या और एंग्जाइटी के बारे में पता चला है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भले ही ज्यादातर लोगों में कोरोना के लक्षण हल्के स्तर के देखे जा रहे हैं पर गंभीर स्थितियों और लॉन्ग कोविड का खतरा अब भी बना हुआ है, इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
हल्के लक्षणों में भी लॉन्ग कोविड का खतरा
अमेरिकी स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना संक्रमण को चार साल से अधिक का समय बीत चुका है, अब भी लॉन्ग कोविड की समस्याओं को लेकर बहुत स्पष्टता नहीं है। कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में लंबे समय तक लक्षण बने हुए देखे जाते रहे हैं, ये बड़ा खतरा हो सकता है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान विभाग की अध्यक्ष फ्रांसेस्का ब्यूडॉइन कहती हैं, कोरोनावायरस से बचाव को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। भले ही नए वैरिएंट्स के कारण ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, पर अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि नया वैरिएंट शरीर को किस स्तर पर क्षति पहुंचा रहा है। ऐसे में लॉन्ग कोविड के जोखिम अब भी हो सकता है।
लंबे समय तक बनी रह सकती हैं दिक्कतें
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, कम से कम 7 प्रतिशत अमेरिकियों ने बताया है कि वे कोविड-19 से ठीक होने के बाद लंबे समय तक इससे संबंधित कई प्रकार की समस्याओं को अनुभव करते रहे हैं। इनमें थकान, सांस लेने में कठिनाई, ब्रेन फॉग, जोड़ों में दर्द और स्वाद-गंध की हानि सहित हृदय रोगों के मामले शामिल है। इस तरह के खतरे को देखते हुए सभी लोगों को निरंतर कोरोना से बचाव के उपायों का पालन जरूरी है।
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स्रोत और संदर्भ
Another covid wave hits U.S. as JN.1 becomes dominant variant
Four years on, long covid still confounds us
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