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Report: आधे से अधिक भारतीय महिलाएं इस समस्या की शिकार, शरीर में कम हो जाता है ऑक्सीजन का स्तर

Wed, 10 Apr 2024 10:28 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 10 Apr 2024 10:28 AM IST
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Anemia in Indian women risk know anemia hypoxia and its complications
भारतीय महिलाओं में एनीमिया - फोटो : iStock

भारतीय महिलाओं में समय के साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया है, एनीमिया का खतरा उनमें से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत की आधी से अधिक महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। साल 2015-2016 में भारतीय महिलाओं में एनीमिया का प्रसार 54% था जो 2019-2020 में बढ़कर 59% हो गया। चिंताजनक बात ये है कि ज्यादातर महिलाओं को इस बात का पता भी नहीं है कि वो एनीमिया की शिकार हैं।



एनीमिया, शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन (एचबी) कम होने की स्थिति को कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की आयु की 57% महिलाओं और छह महीने से 59 महीने के बीच के 67% बच्चों में इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या का खतरा देखा जा रहा है। इसके लक्षणों का समय रहते पहचान और उपचार जरूरी है वरना एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है।

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एनीमिया की समस्या और जोखिम कारक - फोटो : istock

एनीमिया और इसके कारण होने वाली समस्या

हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक आवश्यक प्रोटीन है जो शरीर के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन ले जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं जिन लोगों को एनीमिया होता है उनका रक्त शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है। ऑक्सीजन की कमी होने का स्थिति में अल्पकालिक और दीर्घकालिक तौर पर कई प्रकार की दिक्कतों का जोखिम बढ़ जाता है।

इस स्थिति में सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई, हृदय गति तेज होने और त्वचा के नीला पड़ने का भी खतरा रहता है। वहीं लंबे समय तक बनी रहनी वाली एनीमिया की स्थिति कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताओं और क्रोनिक रोगों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

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लाल रक्त कोशिकाओं की कमी - फोटो : iStock

15 साल से कम उम्र की लड़कियों को एनीमिया का खतरा

भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर भी महिलाओं में एनीमिया बड़ी समस्या रही है। विश्व स्तर पर, एनीमिया 1.62 बिलियन (162 करोड़) लोगों को प्रभावित करने वाली बीमारी है, जो जनसंख्या का 24.8 प्रतिशत है। अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में 15 साल से कम उम्र की 46 प्रतिशत से अधिक लड़कियों को एनीमिया की दिक्कत हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किशोरों में एनीमिया की समस्या विकासात्मक विकारों का भी कारण बन सकती है। ऐसे लोगों के लिए काम पर फोकस कर पाना कठिन हो जाता है। कम उम्र में शारीरिक समस्याओं के कारण दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकती है।

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थकान-कमजोरी की समस्या - फोटो : istock

एनीमिक हाइपोक्सिया की दिक्कत

डॉक्टर्स कहते हैं, शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिक हाइपोक्सिया होने का जोखिम बढ़ जाता है। रक्त में ऑक्सीजन के संचार की क्षमता कम होने कई तरह के दोष हो सकते हैं। एनीमिक हाइपोक्सिया की स्थिति में आपको चक्कर आने, बेहोशी, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर बढ़े रहने, सुस्ती, सांस लेने में कठिनाई सहित कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।

एनीमिया के खतरे से बचाव के लिए आहार की पौष्टिकता का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है। 

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स्वस्थ और पौष्टिक आहार की करें सेवन - फोटो : istock

एनीमिया से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जिनमें लीन प्रोटीन, मछली-मुर्गी, फलियां (जैसे दाल और बीन्स), साबुत अनाज और गहरी हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां शामिल हों उनका सेवन करना चाहिए। विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को आयरन अवशोषित करने में मदद करते हैं इससे भी एनीमिया के जोखिमों से बचाव में मदद मिल सकती है। पौष्टिक आहार का सेवन करके आयरन की कमी और एनीमिया की समस्या से बचाव किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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