कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए अबतक कई तरह की जांच किट बनाई जा चुकी है। इसमें महंगे और सस्ते जांच किट भी हैं, जो थूक से लेकर ब्लड सैंपलों के आधार पर बताती है कि व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं। आने वाले समय में व्यक्ति के सांस लेने की गति से लेकर उसके चलने-फिरने के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि घर में कोई कोरोना से संक्रमित है या नहीं। अमेरिका के मैसाच्युसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने ऐसी ही डिवाइस बनाई है। इस वायरलेस डिवाइस में लगा सेंसर घर में लोगों के चलने-फिरने और सांस लेने की गति पर नजर रखेगा और बता देगा कि किसी को कोरोना संक्रमण है या नहीं।
घर में लोगों के मूवमेंट और सांस लेने की दर के आधार पर कोरोना संक्रमण का पता लगाएगी ये 'डिवाइस'
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यह डिवाइस पूरी तरह से वायरसलेस है, जिसे एमरॉल्ड नाम दिया गया है। इसे घर में किसी दीवार पर लगाया जा सकता है। इसे वाईफाई से कनेक्ट करने के बाद यह काम करने लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है, घर के वैसे सदस्य, जिनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है, उनके लिए घर में रहना ही बेहतर होगा। घर में यदि कोई कोरोना से पीड़ित हो तो यह डिवाइस घर के बाकी सदस्यों को सावधान कर देगी। यानी कि यह डिवाइस घर में सामान्य उपयोग के लिए भी है ताकि संक्रमण से बचने के लिए सावधान रहा जा सके।
कैसे काम करती है डिवाइस
यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर काम करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह डिवाइस घर के लोगों की शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखती है। डिवाइस से निकलने वाले वायरलेस सिग्नल व्यक्ति के मूवमेंट यानी चलने-फिरने का तरीका, उसके नींद की आदत और सबसे जरूरी यानी सांस लेने की गति या दर की जांच करती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक कोरोना मरीज के सांस लेने की दर संक्रमण से पहले सात अप्रैल को 23 थी, जबकि संक्रमित होने के बाद 11 अप्रैल को घटकर 18 हो गई। इसे समझने के लिए नीचे देखें:
इस डिवाइस से जब आपको यह पता चले कि आपके सांस लेने की दर सामान्य नहीं है, इसमें बदलाव हो रहे हैं तो समझ जाना चाहिए कि आपको डॉक्टरी सलाह की जरूरत है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डिवाइस यह बताती है आपके सांस लेने का तरीका कितना बदल रहा है। सांस लेने की दर पहले से बढ़ी है या कम तो नहीं हुई है। चूंकि कोरोना संक्रमण होने से व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है, इसलिए सांस की दर में बदलाव पर आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
बॉस्टन में चल रहा ट्रायल
शोधकर्ता विलियम मैकग्रॉरी के मुताबिक, यह डिवाइस इस्तेमाल करने में आसान है। आपको बस एक बार इसे सेट कर भूल जाना है। यह घर के लोगों की गतिविधियों का अवलोकन खुद ही करता है। इसे हर व्यक्ति को पहनने या पास रखने की जरूरत नहीं होती और न ही इसे किसी कमांड की जरूरत होती है। चूंकि बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है, इसलिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यह डिवाइस ज्यादा उपयोगी साबित होगी। फिलहाल इस डिवाइस का ट्रायल बॉस्टन में चल रहा है। सफलता मिलने पर यह बाजार में उपलब्ध होगा। इसकी मदद से मेडिकल डाटा संग्रह भी किया जा सकेगा।
