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ERIS Covid Variant: भारत में नए वैरिएंट से कितना खतरा, क्या फिर बढ़ सकते हैं गंभीर रोगों के मामले?

Sat, 12 Aug 2023 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 12 Aug 2023 11:53 AM IST
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भारत में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock

यूके में हाल में बढ़े कोरोना संक्रमण के मामलों के लिए नए वैरिएंट एरिस (EG.5.1) को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे 'वैरिएंट ऑफ ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है। इस नए वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए अध्ययन जारी है, फिलहाल इसे गंभीर रोगकारक नहीं माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि  भारत में भी इस वैरिएंट के मामले देखे जा चुके हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देते हैं। क्या वास्तव में यह वैरिएंट बड़े खतरे का कारण बन सकता है? मौजूदा संदर्भ को देखते हुए यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट की प्रकृति गंभीर रोगकारक नहीं है, हालांकि इसमें कुछ अतिरिक्त म्यूटेशन जरूर देखे गए है, जिसके कारण इसकी संक्रामकता को लेकर चिंता जताई जा रही है। प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि यह तेजी से लोगों में संक्रमण बढ़ाने का कारण हो सकता है।

यह ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही एक उप-प्रकार है, ऐसे में इसके कारण गंभीर रोग और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका कम है। आइए जानते हैं कि भारत में इसको लेकर किस प्रकार का जोखिम है?

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स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : पीटीआई

भारत में चिंता का जरूरत नहीं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने नए वैरिएंट के जोखिमों को लेकर आश्वासन दिया कि भारत को कोविड-19 के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। मंडाविया ने कहा कि सरकार नए वैरिएंट के खतरे को ध्यान में रखते हुए जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर दे रही है। देश में कोरोना संक्रमण का जोखिम तो कम है, पर संक्रमण की रोकथाम और बचाव को लेकर सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

अब तक ओमिक्रॉन के जितने सब-वैरिएंट्स सामने आए हैं, इसमें किसी के कारण भी गंभीर रोग का खतरा नहीं देखा गया है।

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कोरोना संक्रमण और इसके जोखिम कारक - फोटो : istock

मई में ही भारत में देखा गया था नया वैरिएंट

नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. एन के अरोड़ा ने टीओआई को बताया कि भारत में ईजी.5 का पता मई-जून में चला था। इस सब-वैरिएंट के कारण देश में पिछले दो महीनों में संक्रमण के बढ़ने या फिर अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में कोई बदलाव नहीं है। यही कारण है कि फिलहाल इसके लेकल लोगों को बहुत ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कोरोना संक्रमण से बचाव के सामान्य उपायों को पालन करके संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है। 

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कोरोना के नए वैरिएंट्स के बारे में जानिए - फोटो : pixabay

इस वैरिएंट की प्रकृति के बारे में समझिए

प्रारंभिक अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि अपने मूल XBB.1.9.2 की तुलना में इस नए वैरिएंट के स्पाइक में अतिरिक्त म्यूटेशन हैं। यह म्यूटेशन पहले के अन्य कोरोनोवायरस वैरिएंट में भी दिखाई दे चुका है। वैज्ञानिक निश्चित नहीं हैं कि यह वैरिएंट कौन सी नई समस्याएं पैदा करने वाला हो सकता है। दुनिया भर में रिपोर्ट किए गए लगभग 35% कोरोना वायरस वैरिंएंट्स में 465 म्यूटेशन मौजूद हैं।  

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कोरोना के नए संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock

कैसी देखी जा रही लोगों में इसके कारण स्थिति 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के जिन देशों में कोरोना के इन नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण की स्थिति देखी गई है, उनमें गंभीर रोग का खतरा कम देखा जा रहा है। ज्यादा जोखिम सिर्फ उन्हीं लोगों में देखा जा रहा है जो या तो कोमोरबिडिटी के शिकार हैं या फिर इम्युनिटी सिस्टम काफी कमजोर है। 

स्क्रिप्स ट्रांसलेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एरिक टोपोल ने कहा, इस एक्सबीबी श्रृंखला में जो उदाहरण थे, उनकी तुलना में इसमें मूल रूप से कुछ अधिक प्रतिरक्षा बचाव वाले गुण देखे जा रहे हैं, यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में इस संक्रमण के बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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