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WHO: भारत में ज्यादातर बच्चों को नहीं मिल पा रहा है पर्याप्त पोषण, विशेषज्ञों ने इस खतरे को लेकर जताई चिंता

Fri, 25 Oct 2024 01:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 25 Oct 2024 01:28 PM IST
सार

भारतीय बच्चों में आहार की पौष्टिकता को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में गंभीर चिंता व्यक्त की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा, भारत में 6-23 महीने की उम्र के 77 प्रतिशत से अधिक बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है। आइए जानते हैं कि इसके क्या नुकसान हो सकते हैं?

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77% of Indian children lack WHO-suggested diet diversity know its health risk
बच्चों का खान-पान - फोटो : freepik.com

बेहतर भविष्य के लिए स्वस्थ बचपन को आधार माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि सभी माता-पिता सुनिश्चित करें कि बच्चों को नियमित रूप से स्वस्थ और पौष्टिक आहार प्राप्त होता रहे। विटामिन्स-मिनरल्स और पोषक तत्वों से भरपूर आहार न सिर्फ बच्चों के बेहतर विकास में सहायक होते हैं साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देकर उन्हें भविष्य में होने वाली कई प्रकार की बीमारियों से भी बचाने में मदद करते हैं। क्या आपके बच्चे को आहार के माध्यम से जरूरी सभी पौष्टिक चीजें प्राप्त हो रही हैं?



भारतीय बच्चों में आहार की पौष्टिकता को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में गंभीर चिंता व्यक्त की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा, भारत में 6-23 महीने की उम्र के 77 प्रतिशत से अधिक बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ज्यादातर बच्चों को डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित आहार नहीं मिल पा रहा है। यह भविष्य के लिए कई प्रकार से चिंताजनक है। 

77% of Indian children lack WHO-suggested diet diversity know its health risk
बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण जरूरी - फोटो : Freepik.com

बच्चों को नहीं मिल पा रहा है पर्याप्त पोषण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा नवजात से लेकर छह माह तक के बच्चों को मां का दूध और एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को नियमित रूप से दूध, अंडे, फलियां, फल और सब्जियों का संतुलित सेवन जरूरी है। हालांकि ज्यादातर बच्चों को पौष्टिकता नहीं मिल पा रही है।

राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5, 2019-21) के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रों में आहार संबंधी ये दिक्कतें सबसे ज्यादा देखी जा रही हैं। सिक्किम और मेघालय में पौष्टिक आहार न मिल पाने वाले बच्चों की संख्या 50 प्रतिशत के करीब है। 

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स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है बेहतर पोषण - फोटो : Freepik.com

आहार में पहले से हुआ है सुधार

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बच्चों के लिए आहार को पौष्टिक तभी माना जा सकता है जब इसमें पांच तरह के खाद्य पदार्थ शामिल हों। सर्वेक्षण में पाया गया है कि 2005-06 के एनएफएचएस-3 डेटा की तुलना में फिलहाल सुधार तो हुआ है पर अब भी इस दिशा में बहुत काम किया जाना बाकी है। पहले की तुलना में बच्चों के आहार में अंडे, फलियां और नट्स की मात्रा तो बढ़ी है हालांकि ये बच्चों के लिए जरूरी पर्याप्त पोषकता के लिए काफी नहीं है। 

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77% of Indian children lack WHO-suggested diet diversity know its health risk
बच्चों का पोषण - फोटो : Freepik.com

अधिकतर नवजात को नहीं मिल पाता है मां का दूध

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा सबसे बड़ी चिंता की बात अधिकतर नवजात और छह माह से कम आयु वाले बच्चों को मां का दूध न मिल पाना है। ये बेहतर पोषण के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। एक साल और इससे अधिक उम्र के अधिकतर बच्चों को दूध और अन्य डेयरी उत्पाद भी नहीं मिल पाते हैं जो कैल्शियम के लिए सबसे आवश्यक माना जाता है।

बच्चों के विकास, हड्डियों की मजबूती और दांतों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए ये सबसे आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है।

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77% of Indian children lack WHO-suggested diet diversity know its health risk
बच्चों के लिए जरूरी है बेहतर पोषण - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, सर्वेक्षण में पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली और अशिक्षित माताओं से जन्मे बच्चों में पोषण की समस्याओं के मामले अधिक देखे गए हैं। पोषक तत्व न मिल पाने के कारण बच्चों में एनीमिया का खतरा हो सकता है, जिससे शारीरिक और मानसिक विकास दोनों प्रभावित हो सकता है।

अध्ययन के लेखकों ने एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा, ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिलता रहे। भविष्य में भी उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के लिए ये बहुत आवश्यक हो जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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