प्यार, मोहब्बत और भाईचारे का पर्व ईद इस बार 4 या 5 जून को मनाया जाएगा। माह ए पाक रमजान की विदाई के साथ ही मुस्लिम भाई चांद दिखने का इंतजार करते हैं और आसमान में चांद के रौशन होते ही ईद की रंगत और रौनक पूरी दुनिया में फैल जाती है। रमजान के पाक महीने में सब्र के 30 रोजे रखने के बाद ईद एक ऐसी रौनक के रूप में दाखिल होती है जहां प्यार, भाईचारा, अपनत्व और स्नेह बिखरा होता है। कम ही लोग जानते हैं आखिर रमजान खत्म होने के बाद ईद क्यों मनाई जाती है। आइए जानते हैं ईद मनाने की वजह और मान्यताएं।
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Eid al Fitr 2019: बेहद खास है ईद मनाने की वजह
Wed, 05 Jun 2019 10:06 AM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Wed, 05 Jun 2019 10:06 AM IST
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ईद-उल-फितर या ईद सबसे पहले 624 ई. में मनाई गई थी। इस्लामिक कैलेंडर यानी की हिजरी कैलेंडर इसमें पहले एक साल का 9वां महीना होता था। इस्लाम में इसे ही रमजान कहा जाता था। यही वह महीना है जिसमें मोहम्मद पैगंबर साहेब कुरान का इलहाम हुआ था। यानी की कुरान इस पाक महीने में लिखी गई।
खास बात यह है कि 30 दिन के इस महीने में आखिरी दिन का रोजा आसमान में चांद के दीदार के साथ तोड़ा जाता है और चांद दीदार के बाद ईद मनाई जाती है। हालांकि ईद को मनाने के पीछे एक वजह और भी है। दरअसल, कहा जाता है कि इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद ने इसी दिन बद्र के युद्ध में जीत हासिल की थी और इसी की खुशी में ईद मनाई जाती है।
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ईद के कुछ दिन पहले अलविदा जुम्मा बेहद खास माना जाता है। यह रमजान के महीने का आखिरी शुक्रवार होता है। हिजरी कैलेण्डर के मुताबिक साल में दो बार ईद मनाई जाती है। एक ईद-उल-फितर और दूसरी ईद-उल-जुहा। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। और दूसरी ईद को बकरीद।
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ईद के दिन मुसलमान भाई सुबह नमाज अदा करते हैं और मीठा खिलाकर रमजान के सारे रोजों के खत्म होने की खुशियां मनाते हैं। इस दिन दान यानी की जकात का भी खास महत्व है। हालांकि रमजान में रोजे के दौरान भी जकात का खास महत्व है।