पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके के अध्यक्ष एम. करुणानिधि की तबीयत नाजुक बनी हुई है। जिसके चलते वह चेन्नई के कावेरी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। अस्पताल के बाहर भारी संख्या में भीड़ जुटी हैं। लोग तीन दिन से भूखे प्यासे अस्पताल के बाहर खड़े उनके लिए दुआएं मांग रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में जानें महज 14 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखने वाले करुणानिधि के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें...
14 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ करुणानिधि राजनीति के मैदान में उतर गये थे। उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया जब 1937 में स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य किया जा रहा था तो उन्होंने ही 'हिंदी-हटाओ आंदोलन' कर इस फैसले का विरोध किया था। उन्होंने कलम की ताकत का इस्तेमाल कर हिंदी को अनिवार्य बनाए जाने के खिलाफ जमकर लिखा और यहीं से उन्हें पहचान मिली।
हिंदी विरोध आंदोलन के बाद करुणानिधि नाटक, अखबार और फिल्मों के लिए लिखने लगे। उनकी बेहतरीन लेखन शैली को देखते हुए पेरियार और अन्नादुराई ने उन्हें पार्टी की पत्रिका 'कुदियारासु' का संपादक बना दिया। कुछ समय के बाद पेरियार और अन्नादुराई के बीच मतभेद हुआ और दोनों अलग हो गये, जिसमें करुणानिधि ने अन्नादुराई का हाथ थामा और उनके साथ जुड़ गये। इसके बाद उन्होंने कभी वापस मुड़कर नहीं देखा।
60 साल के राजनीतिक करियर में करुणानिधि 5 बार मुख्यमंत्री और 12 बार विधानसभा सदस्य रहे हैं। वह जितनी बार भी चुनाव लड़े, उन्होंने हमेशा जीत दर्ज की है। प्यार से उनके समर्थक उन्हें 'कलाईनार' यानी "कला का विद्वान" कहकर बुलाते हैं।
अपने जीवन में करुणानिधि ने तीन शादियां की। उनकी पहली पत्नी का नाम पद्मावती था, जिनका देहांत हो चुका है। उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्माल और तीसरी पत्नी रजती अम्माल हैं। तीनों पत्नियों से उनके चार बेटे और दो बेटियां हैं।