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RSS स्थापना दिवस: भारत भऱ में लगती हैं संघ की 50000 शाखा, जानें RSS की बड़ी बातें
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:12 AM IST
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विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 90वां स्थापना दिवस है । वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विश्व के सबसे बड़े अनुषांगिक संगठनों में से एक माना जाता है । एक आंकड़े के मुताबिक देश भर में संघ की 50 हजार से ज्यादा शाखाएं संचालित होती हैं । इसके अलावा विदेशों के भी 40 देशों में संघ की 700 से अधिक शाखाएं संचालित होती हैं । आज अपने 90 वर्ष पूरे कर चुके आरएसएस ने इतिहास के कई मौकों पर देश की अखंडता और संप्रभुता के संरक्षण के उद्देश्य से सरकारों के साथ कई मौकों पर बड़ी भूमिका निभाई है । तस्वीरें :
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवकों ने 1947 में कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगातार नजर बनाए रखी थी । संघ के स्वयंसेवक सरहद पर पाकिस्तान की हर हरकत पर निगरानी रख रहे थे । पाकिस्तान लगातार सीमा लांघकर कश्मीर में घुसने की तैयारी में था लेकिन कश्मीर के तत्कालीन राजा को इसका पता भी नहीं था । इसी बीच पाकिस्तान की सेना नें सरहद पार करके कश्मीर में घुसपैठ की इस दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने उनसे संघर्ष किया और कई स्वयंसेवकों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए ।
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संघ के स्वयंसेवकों ने भारत पाकिस्तान के विभाजन के बाद देश भर में तनाव के वक्त बड़ी भूमिका निभाई । संघ के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए करीब 3000 राहत शिविर लगाए ।
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1962 के युद्ध में संघ ने सेना के साथ सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, रसद और आपूर्ति के कामों में मदद की । जिसके बाद जवाहर लाल नेहरू को 1963 में 26 जनवरी की परेड में संघ को शामिल होने का निमंत्रण देना पड़ा था । परेड करने के निमंत्रण दिए जाने की आलोचना होने पर तत्कालीन पीएम पंडित नेहरू ने कहा- “यह दर्शाने के लिए कि केवल लाठी के बल पर भी सफलतापूर्वक बम और चीनी सशस्त्र बलों से लड़ा सकता है, विशेष रूप से 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए आरएसएस को आकस्मिक आमंत्रित किया गया.”
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जानकारी के मुताबिक आजादी के बाद कश्मीर के महाराजा हरि सिंह कश्मीर के भारत में विलय का फ़ैसला नहीं कर पा रहे थे और उधर कबाइलियों के भेस में पाकिस्तानी सेना सीमा में घुसती जा रही थी । इस दौरान तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने संघ के प्रचारकों से मदद मांगी । उस दौरान संघ के शीर्ष नेतृत्व के सदस्य माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने कश्मीर के राजा हरि सिंह से मुलाकात की जिसके बाद हरि सिंह ने कश्मीर के विलय का प्रस्ताव दिल्ली भेजा ।