दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले के हादिगाम इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों और परिवार वालों के प्रयासों से दो युवाओं की जान बचाई गई। मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों को सरेंडर का मौका दिया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी के अनुसार अगर हर माता-पिता ऐसे ही अपील करे तो बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
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Kulgam Terrorist Surrender
- फोटो : सोशल मीडिया
मुठभेड़ के दौरान परिवार द्वारा आतंकवादियों को अपील करने का भी वीडियो सामने आया है, जिसमें परिवार वाले मकान में फंसे आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने की अपील कर रहे हैं। वीडियो में एक आतंकवादी नदीम की मां कश्मीरी में कह रही है, 'नदीम साब। अगर कोई गलती हुई होगी तो मैं उनसे (सुरक्षाबलों) कहूंगी माफी दे दो। नदीम साब बहार आ जाओ। मैं तेरी मां बोल रही हूं। कहां है तुम्हारे से अपनी जान वारु बाहर आ जा। पापा भी यहां है। मैं तुम्हारे बदले माफी मांगूंगी। सीओ और एसएसपी साहब कह रहे हैं कि हम कुछ नहीं करेंगे।'
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Kulgam Terrorist Surrender
- फोटो : सोशल मीडिया
इतने में नदीम का पिता भी उससे सरेंडर की अपील करते हुए यह कहता सुनाई दे रहा है कि नदीम आपके साथ जो कफील है, उसके परिवार वाले भी यहां आए हैं। बाहर आ जा। वहीं, सेना के एक अधिकारी द्वारा कहा गया, 'नदीम और कफील आप दोनों को मौका दे रहे हैं। सरेंडर करो, बाहर आ जाओ। सामान वहीं पर छोड़ दो और बाहर आ जाओ। यही मौका है आपके पास। चारो तरफ फौज और पुलिस है, कुछ नहीं होगा। तुम लोग हथियार डालो और बाहर आ जाओ।'
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Kulgam Terrorist Surrender
- फोटो : सोशल मीडिया
वहीं, जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने सुरक्षाबलों को उनकी इस सफलता के लिए और युवाओं को एक नैक जिंदगी जीने का मौका प्रदान करने के लिए बधाई भी दी। आईजीपी कश्मीर ने कहा, 'अगर हर माता-पिता अपने आतंकवादी बेटों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करते हैं, चाहे वे लाइव एनकाउंटर के दौरान फंस गए हों या आतंकवाद में शामिल हो गए हों, कई लोगों की जान बचाई जा सकती है क्योंकि आज की मुठभेड़ में दो लोगों की जान बच गई।'
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Mehbooba Mufti
- फोटो : बासित जरगर
गौरतलब है कि पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षाबलों के आत्मसमर्पण के लिए किए गए समर्थन की सहायता की। महबूबा ने कहा, 'उनके परिवारों के प्रयासों और सुरक्षा बलों द्वारा दिए गए समर्थन की बदौलत दो लोगों की जान बच गई। इस तरह के प्रयास जारी रहने चाहिए ताकि आतंकवाद में शामिल होने वाले युवाओं को अपना जीवन जीने का दूसरा मौका दिया जा सके।'