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फल खाने वाला ये बाबा डंडे से देता है आशीर्वाद

Sat, 23 Sep 2017 07:41 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 23 Sep 2017 07:41 PM IST
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These tales related to Falahari Baba, who kept them in the headlines
फलाहारी बाबा - फोटो : amar ujala
यौन शोषण के आरोपों में फंसे रामानुजाचार्य कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी बाबा से जुड़े कई रोचक किस्से भी हैं जो उन्हें हमेशा से ही भक्तों के बीच सुर्खियों में रखते हैं। यहां तक कि दूर-दूर से लोग इन किस्सों के पीछे की हकीकत जानने उनके पास पहुंचते थे।


बताया जाता है कि बाबा किसी भक्त को छूता नहीं है, बल्कि हमेशा अपने साथ डंडा रखता है।यदि किसी भक्त को आशीर्वाद देना होता तो वह डंडे के स्पर्श से ही आशीर्वाद देता। यहां तक कि बाबा के पैरों को छूने की भी इजाजत किसी को नहीं दी जाती। केवल गुरुपूर्णिमा के दिन ही बाबा के भक्त उसके पैर छूते।

भक्तों को ये शिक्षा

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फलाहारी बाबा - फोटो : amar ujala
भक्त उसके नाम को लेकर ही आश्रम तक खिंचे चले आते हैं। दरअसल उसके नाम में फलाहारी शब्द जुड़ा है। लोगों के अनुसार फलाहारी से सीधा अर्थ ये है कि बाबा खुद भी भोजन के रूप में केवल फलाहार का सेवन करता है। यहां तक कि पीने के लिए गंगाजल को श्रेष्ठ बताता है।

 

आश्रम बनाकर जमाया और प्रभाव

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फलाहारी बाबा - फोटो : amar ujala
फलाहारी बाबा अपने भक्तों को भी फलाहार और गंगाजल का सेवन करने की सलाह देता। बाबा मूलत: तो उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है, लेकिन उसने अलवर में आश्रम बनाकर यहां अपना प्रभाव जमाया। बताया जाता है कि वर्ष 1988 में बाबा यूपी से अलवर आया।
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अच्छी बारिश के लिए ये समाधि

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फलाहारी बाबा - फोटो : amar ujala
बारिश के दौरान भी बाबा सुर्खियां बटोरने में पीछे नहीं रहता। इलाके में अच्छी बारिश हो इसलिए वे जल में समाधि लगाता है। कहा जाता है कि उसके समाधि लगाने के बाद अच्छी बरसात होती। हालांकि, सच्चाई क्या है ये तो वह ही जानता है।
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वेद विद्यालय तक बनाया

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फलाहारी बाबा - फोटो : amar ujala
फलाहारी बाबा ने राजस्थान के अलवर में स्थित काला कुआं इलाके में अपना आश्रम बनाया। यहां करीब दो साल पहले ही बाबा ने आश्रम के पास में श्रीवेंकटेश तिरूपति बालाजी दिव्य धाम का निर्माण कराया। बाबा ने 2004 में रामकिशन कॉलोनी में वेद विद्यालय खोला।

 
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