नागरिक सुरक्षा के प्रति जवाबदेह सरकारें केवल राजनीति में ही उलझी रहती हैं। जिसका नतीजा है कि क्राइम ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि क्राइम कंट्रोल को लेकर अपनी पीठ थपथपाने वाली सरकारों के राज्यों में स्थिति बहुत खराब है। इसका नमूना राजस्थान में देखने को मिला है।
शायद ये आंकड़े कर दें सजग
राजस्थान में महिला मुख्यमंत्री होने के बाद भी यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। एनसीआरबी के अनुसार देश में महिला अपराधों के मामलों में राजस्थान चौथे नंबर पर काबिज है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार को चार वर्ष पूर्ण होने के समय सामने आए ये आंकड़ें शायद सरकार को सजग कर सके।
अपनी ही वाहवाही करने से क्या हुआ हासिल
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ दिन पूर्व ही राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया प्रदेश में क्राइम कंट्रोल को लेकर पुलिस मुख्यालय में अपनी कोरी उपलब्धि गिना चुके हैं। जबकि हकीकत यह है वर्ष 2015 के बाद वर्ष 2016 में भी महिला अपराध के मामले में राजस्थान ने देश में अपना चौथा स्थान बरकरार रखा है।
नाममात्र की कमी आई है सामने
हालांकि आंकड़ों के लिहाज से अपराधों की संख्या में मामूली कमी जरूर आई है। जानकारी के अनुसार जहां वर्ष 2015 में महिला अपराध के केसों की संख्या 28224 थी वहीं वर्ष 2016 में यह संख्या 27422 रही है।
नए डीजीपी से उम्मीदें
जहां बृहस्पतिवार को एक और एनसीआरबी का डेटा सामने आया वहीं इसी दिन राजस्थान को ओ पी गलहोत्रा के तौर पर नया डीजीपी भी मिला है। राजस्थान पुलिस के इस नए मुखिया को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पांच सीनियर अधिकारियों पर तरजीह दी है। डीजीपी गलहोत्रा को सीबीआई में लंबे समय तक कार्य करने का अनुभव है। उम्मीद जताई जा रही है कि वे शायद राजस्थान में बढ़ते क्राइम को कंट्रोल कर सकें।