तड़के फोन की घंटी बजी और दूसरी और से आयी एक आवाज ने संजीव गर्ग की दुनिया बदलकर रख दी। आंखों के आगे अंधेरा छा गया पत्नी ने संभालने का प्रयास किया और कारण जानना चाहा तो सिर्फ आंसू निकले और बेहोशी छा गई।
जयपुर में लोहे का कारोबार करने वाले संजीव गर्ग का हंसता-खेलता परिवार आज सुबह आग की भेंट चढ़ गया। दरअसल जयपुर के विद्याद्यर नगर के रहने वाले संजीव गर्ग के घर में अज्ञात कारणों से आग लग गई। इतना ही नहीं आग के बाद घर में सिलेंडर ब्लास्ट भी हुआ। जिसके बाद उनके घर के परखच्चे उड़ गए और घर में मौजूद उनके बच्चे व बुजुर्ग पिता मौत की भेंट चढ़ गए।
खत्म हो गया पूरा परिवार
जिंदगी उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें दुख के इस भंवर में लाकर खड़ा कर देगी यह शायद संजीव गर्ग ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। सुबह हुए हादसे के बाद संजीव गर्ग के कदम जयपुर की ओर बढ़ने के लिए उठ भी नहीं रहे थे। जिन लोगों की हादसे में मौत हुई है उनमें संजीव गर्ग के पिता महेन्द्र गर्ग (75), बेटी अर्पिता (22), अपूर्वा (20), बेटा अनिमेष (18) व भांजा शौर्य (20) वर्ष सम्मलित है।
मदद के लिए पुकारते रहे
जानकारी के अनुसार आग लगने के बाद घर से बचाने के लिए काफी आवाजें आती रही। लेकिन सिलेंडर ब्लास्ट और आग की लपटें ज्यादा होने के कारण मदद में परेशानी हुई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार सभी मौत दम घुटने से झुलसने के कारण हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जिन पांच लोगों की मौत हुई है उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया था या अस्पताल में उनकी मौत हुई है।
पहले लगी आग
संजीव गर्ग के पड़ौसियों के अनुसार सबसे पहले घर में आग लगी। हालांकि अभी तक यह पुख्ता नहीं है कि आग किस कारण से लगी थी। लेकिन चश्मदीदों के अनुसार दो मंजिला घर के निचले हिस्से में आग लगी थी। जिसके कुछ मिनट बाद सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ।
इसके बाद घर में मौजूद लोगों को बचाने का भी प्रयास किया गया। लेकिन आग इतनी विकराल थी कि मदद के सभी प्रयास बेकार हो गए। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है दमकल की गाड़ियां मौके पर करीब डेढ़ घंटे देर से पहुंची। जिस कारण हादसा बढ़ा हो गया।
नहीं काम आए उपकरण
आग बुझाने और घर में फंसे लोगों को निकालने के लिए मौके पर पहुंची दमकल कर्मी लापरवाह नजर आए। पड़ौसियों ने बताया कि सूचना देने के करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंचे दमकल विभाग के कर्मचारियों के पास कोई उपकरण नहीं थे। यहीं नहीं घर में फंसे लोग मदद के लिए छत से चिल्लाते रहे लेकिन दमकलकर्मीयों ने उनकी कोई मदद नहीं की।