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पद्मावती को लेकर स्कूली किताबों में ऐसी कहानी! मंत्री को देनी पड़ी सफाई

Fri, 24 Nov 2017 05:57 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 24 Nov 2017 05:57 PM IST
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padmavati row:  education minister statement about story of padmini in books
पद्मावती - फोटो : अमर उजाला
संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावती' पर विवाद जोरों पर चल रहा है। लेकिन राजस्थान के सरकारी स्कूलों की किताबों में जो पद्मावती की कहानी पढ़ाई जा रही है, उस पर विश्वास करना ही मुश्किल है। जब ये मुद्दा उठा, तो राजस्थान के शिक्षा राज्य मंत्री को सफाई देनी पड़ी।

बोर्ड करेगा पद्मावती पर लिखे अध्याय का परीक्षण

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वासुदेव देवनानी
शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने आज कहा कि पाठ्यक्रमों में से किसी भी महापुरुष का नाम नहीं हटाया गया है। जहां तक पद्मावती का विषय है, जिन बातों पर विवाद उपजा है, उन अध्यायों का परीक्षण करवाया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस अध्याय का परीक्षण करेगा।

ये है कहानी में लिखा हुआ

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किताब का पेज - फोटो : अमर उजाला
सरकारी स्कूल की किताब की मानें तो राजा रतनसिंह और पद्मिनी यानी पद्मावती की शादी का दास्तां भी कम रोचक नहीं है।  सरकारी स्कूलों की बारहवीं की किताब में पद्मिनी की यह कहानी पढ़ाई जा रही है। कहानी के मुताबिक सिंहल द्वीर (श्रीलंका) में गंधर्वसेन नामक राजा था। उसकी रानी चंपावती के पद्मिनी नाम की बेटी थी। वह बहुत ही सुंदर थी। उसके पास हीरामन नाम का तोता था, जो बहुत चतुर था।


 
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तोते ने बताया था रतन सिंह को

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Padmavati
एक दिन हीरामन तोता पिंजरे से उड़ गया और एक शिकारी ने पकड़कर उसे एक ब्राह्मण को बेच दिया। वो ब्राह्मण ने उस तोते को चितौड़ के राजा रतन सिंह को एक लाख रुपए में बेच दिया। कहानी में लिखा गया है कि रत्न सिंह की रानी नागमती ने सज संवरकर तोते से पूछा कि क्या मेरे जैसा दुनिया में कोई और भी है। तो तोते ने कहा कि जिस सरोवर में हंस नहीं आता उसमें बगुला ही हंस कहलाता है। रतन सिंह तोते के मुंह से पद्मिनी की तारीफ सुनकर मुग्ध हो गया।

 
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तब जाकर हुई दोनों की शादी

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पद्मिनी
इसके बाद वह योग बनकर तोते के साथ सिंहल देश चला गया। कई परेशानियों को पार करता हुआ वो सिंहल देश पहुंचा। सरकारी किताब के अनुसार तोते ने पद्मिनी से रतन सिंह की खूब प्रशंसा की। दोनों एक दूसरे को देखकर ही प्रेम बद्ध हो गए। इसके बाद राजा गंधर्व सेन ने रतन सिंह के बारे में जानकर पद्मिनी से उसकी शादी करवा दी।


 
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