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'पद्मावती' देख इतिहासकारों ने सेंसर बोर्ड को बताई थीं ये आपत्तियां, जानें...
Fri, 19 Jan 2018 10:58 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 19 Jan 2018 10:58 AM IST
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padmavati
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निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावत' को 25 जनवरी को रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। फिल्म के नाम से आखिर का 'आई' हटा दिया गया है और कहानी में कुछ कट भी लगाने की बातें सामने आ रही हैं। फिल्म को लेकर इतिहासकारों के एक्सपर्ट पैनल ने कई आपत्तियां दर्ज करवाई थीं।
रिकॉर्ड करवाई थी अपनी बात
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पद्मावती
- फोटो : अमर उजाला
फिल्म देखने के बाद पैनल के सदस्यों ने कहा था कि यह फिल्म आपत्तियों से भरी हुई है। सूत्रों ने बताया कि पैनल ने यहां तक कह दिया था कि ये फिल्म रिलीज होने लायक ही नहीं है। पैनल ने सीबीएफसी को अपनी मौखिक आपत्तियां फिल्म देखने के बाद ही रिकॉर्ड करवा दी थी।
इतिहास और कल्पना दोनों हैं अलग
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पद्मावती
- फोटो : अमर उजाला
पैनल के सदस्य इग्नू के इतिहास के विभागाध्यक्ष कपिल कुमार ने कहा था कि हमने खुले दिमाग से और इतिहास की नजरों से फिल्म को देखा। हमें लगा कि इतिहास और कल्पना दो अलग अलग चीजें हैं। इतिहास तथ्यों पर ही आधारित होता है और कल्पना तो कैसे भी की जा सकती है। एेसे में इतिहास पर बनने वाली फिल्म में कल्पना का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
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नई पीढ़ी इसे ही मानने लगेगी इतिहास
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पद्मावती
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा था कि जब फिल्म का नाम, पात्रों के नाम और स्थान के नाम और घटनाएं ऐतिहासिक हैं तो स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी दिखाया जाना उचित नहीं है। बल्कि इसे मैं खिलवाड़ ही कहूंगा, क्योंकि नई पीढ़ी फिल्म को ही इतिहास मानने लगेगी।
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क्रिएटिवटी की भी होती है एक सीमा
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पद्मावती
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास के साथ हमेशा तोड़ मरोड़ होती रही है। क्रिएटिविटी की एक सीमा होती है और इसके नाम पर दो समुदायों को आमने सामने नहीं किया जा सकता है। इस इतिहास की फिल्म को जायसी पर आधारित बताया गया है और केवल फारसी स्त्रोतों का ही अध्ययन किया गया है। जबकि इतिहास पर बनने वाली फिल्म पर सभी भाषाओं के स्त्रोतों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
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