आरके चावल हत्याकांडः तो क्या इज्जत के सवाल पर करवा दी थी एनएचएआई कंसल्टेंट की हत्या
वैशाली नगर सि्थत कार्यालय में मीटिंग के दौरान चावला सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले तो शूटरों ने उन पर गोली चला दी और फरार हो गए। मुख्य आरोपी श्योराण की कंपनी के देश के कई राज्यों में प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कंपनी हिसार में और कारपोरेट कार्यालय गुरुग्राम में है।
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नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) के कंसल्टेंट आरके चावला की हत्या की वजह 3.5 करोड़ के जुर्माने के अलावा दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे पर बन रहे फुट ओवर ब्रिज के डिजाइन और टेंडर की शर्तों में बदलाव भी सामने आया है। चावला की गत 26 अगस्त को जयपुर में दिनदहाड़ गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस इस मामले में ई-5 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. कंपनी के एमडी कुलदीप श्योराण सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और दो अन्य की तलाश में जुटी है।
जांच में सामने आया है कि कुलदीप श्योराण ने अपना काम निकलवाने और जुर्माना राशि माफ करवाने के लिए आरके चावला के कई मौकों पर प्रलोभन दिए थे पर वह नहीं माने। इससे श्योराण खफा था और उसने चावला की हत्या की साजिश रची। दरअसल मामला 3.5 करोड़ के जुर्माने का नहीं था, क्योंकि इस राशि से श्योराण की कंपनी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था। कंपनी ने पिछले साल ही 700 करोड़ का कारोबार किया था, ऐसे में जुर्माना राशि कोई मायने नहीं रखती थी। श्योरणा ने इसे अपनी इज्जत का सवाल बना लिया था और चावला की हत्या के लिए शूटरों को जिम्मा सौंपा।
चावला सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले तो शूटरों ने गोली चला दी
अतिरक्त पुलिस उपायुक्त(पश्चिम) राम सिंह ने बताया कि इस मामले में फरार शूटरों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि श्योराण ने ही शूटरों के लिए हथियार उपलब्ध करवाए थे। उसके स्टाफ के दो साथी शूटरों के साथ 26 अगस्तको जयपुर आए और आम्रपाली सर्कल के पास छोड़ दिया था। वैशाली नगर सि्थत कार्यालय में मीटिंग के दौरान चावला सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले तो शूटरों ने उन पर गोली चला दी और फरार हो गए। मुख्य आरोपी श्योराण की कंपनी के देश के कई राज्यों में प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कंपनी हिसार में और कारपोरेट कार्यालय गुरुग्राम में है। कंपनी ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, गुजरात, आंध्रप्रदेश और नेपाल में कई हाइवे और सिविल कार्यों के प्रोजेक्ट ले रखे हैं।
पुलिस ने बताया कि एनएचएआई ने गुरुग्राम-कोटपुतली-जयपुर खंड पर एफओबी के निर्माण के लिए श्योराण की कंपनी का चयन किया था। इसके लिए 35 करोड़ का टेंडर निकाला गया था। सभी एफओबी सिंगल स्पान(बिना बीच में पिलर वाले) वाले बनाने थे और निर्माण पूरा करने की अवधि अगस्त 2021 तय की गई थी। इस प्रोजेक्ट पर निगरानी के लिए एनएचएआई ने एक और फर्म का चयन किया था, जिसने चावला को प्रोजेक्ट कंसल्टेंट के रूप नियुक्त किया था। चावला का काम निर्माण कार्य और तकनीकी पहलुओं पर भी नजर रखना था।
एफओबी की डिजाइन और टेंडर शर्तों में बदलाव चाहता था श्योराण
प्रोजेक्ट जल्द ही अटक गया। निर्माण और डिजाइन को लेकर काम में रुकावट आने लगी। दरअसल श्योराण टेंडर की शर्तों में और प्रोजेक्ट की डेडलाइन बदलवाने के साथ ही एफओबी की डिजाइन भी सिंगल स्पान से डबल करवाना चाहता था और हत्या का कारण भी यह वजह बनी। डबल स्पान वाले एफओबी में कम खर्च आता है, इसलिए कंपनी चाहती थी इसकी डिजाइन और नक्शे में बदलाव हो जाए। एनएचएआई ने एफओबी का टेंडर इस शर्त पर जारी किया था कि डिजाइन में बदलाव पर लागत में भी संशोधन किया जाएगा। इसके लिए कुलदीप श्योरणा तैयार नहीं था और काम में देरी होने लगी। इस पर एनएचएआई ने श्योराण पर 3.5 करोड़ का जुर्माना लगाया।