खेती योग्य जमीन पर लगातार सरकारी एजेंसियां की आवाप्ति से धरतीपुत्र परेशान हैं। इसलिए वह विरोध के नए नए तरीके अपना रहा हैं। जयपुर के नजदीक नींदड़ गांव में इन दिनों ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां जमीन आवाप्ति का विरोध कर रहे 21 किसानों ने समाधि ले रखी है।
लगातार हो रहा है विरोध
जमीन समाधि गांधी जयंती के मौके पर सोमवार को ली गई थी। लेकिन सरकार का रुख देखते हुए आज भी किसान समाधि में ही हैं। इससे पूर्व किसान बीते 20 दिनों से अलग-अलग तरीके से जयपुर विकास प्राधिकरण के जमीन आवाप्ति का विरोध कर चुके हैं। लेकिन बात नहीं बनते देख किसानों ने जमीन समाधि सत्याग्रह का रास्ता अपनाया है।
नहीं सुन रहे अधिकारी
आधा शरीर गड्ढे में दबाए महिला-पुरुष भूखे प्यासे खड़े हैं। लेकिन अभी तक कोई भी सरकारी नुमाइंदा इन लोगों से मिलने नहीं पहुंचा है। किसान इस बात से भी खफा हैं कि लंबे समय से विरोध के बावजूद सरकारी अधिकारी उनसे बात नहीं कर रहे हैं। जबकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि काननू के अनुसार ही कार्य किया जा रहा है।
महिलाएं भी होने लगीं शामिल
हालांकि प्रशासन की ओर से मंगलवार को किसानों को समझाइश का प्रयास किया गया था। लेकिन किसानों की मांग है कि जेडीए जिस 1350 बीघा जमीन को आवाप्त कर रहा है उसे निरस्त किया जाए। वहीं जेडीए नई कॉलोनी के लिए यह जमीन आवाप्त कर रहा है। किसानों ने यह संघर्ष संयोजक नगेन्द्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में प्रारंभ किया है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं भी जमीन समाधि सत्याग्रह में सम्मलित हो रही हैं।
आगे की दिशा नहीं है तय
जेडीए 18 दिन पूर्व ही आवाप्ति की कार्रवाई भी प्रारंभ कर चुका है। जेडीए अधिकारियों के अनुसार अभी तक करीब 500 बीघा जमीन आवाप्त की जा चुकी है। इधर किसानों ने जेडीए से मुआवजा लेने से भी इंकार कर दिया। अब जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी सीधी कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि पूर्व में किसानों ने कार्रवाई के विरोध में जेडीए की ओर से बनाई गई सड़क को तोड़ दिया था। यहीं नहीं किसानों ने कई जगह पर रास्ता बंद कर भी विरोध जताया था।