बड़े परदे पर कुणाल खेमू पहली बार 27 साल पहले दिखे बाल कलाकार के रूप में। फिर 15 साल पहले वह फिल्म ‘कलयुग’ से हीरो बने। इस साल के शुरू में रिलीज हुई फिल्म ‘मलंग’ को उनकी कमबैक फिल्म माना गया और अब फिल्म ‘लूटकेस’ इस सीजन की फेवरिट कॉमेडी फिल्म मानी जा रही है। कुणाल खेमू से अमर उजाला की एक खास मुलाकात।
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लेकिन, वह तो बचपन की बात रही, क्या वाकई बड़े होकर भी आप अभिनेता ही बनना चाहते थे?
एक बाल कलाकार के तौर पर मैंने कुछ ही फिल्में कीं क्योंकि तब वह मेरा पेशा नहीं था। शायद मेरे मां-बाप भी तब यही सोचते होंगे कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर या इंजीनियर जैसा कुछ बनूंगा। मुझे भी नहीं पता था कि मैं क्या करने वाला हूं। लेकिन जब फिल्म 'जख्म' में मुझे काम मिला तो मुझे लगा कि एक अभिनेता के रूप में मुझे अपने आपको एक मौका देना चाहिए। इसके बाद फिल्मों में आने से पहले मैंने पांच साल तक थिएटर किया। और इसमें मेरे परिवार का मुझे पूरा सहयोग मिला।
हम हैं राही प्यार के और राजा हिंदुस्तानी में आमिर खान के साथ काम करने की आपकी क्या यादें हैं?
मैं उस वक्त गंभीर किस्म का बच्चा हुआ करता था। लोग मुझे देखकर कहते थे कि मैं तो बहुत पेशेवर लगता हूं। मेरी जितनी भी शैतानियां हुआ करती थीं वह या तो फिल्म के सेट के बाहर होती थीं या फिर सिर्फ घर पर। सेट पर मैं फिल्म के काम को बहुत ध्यान से देखता था। मैं इस मामले में बहुत जिज्ञासु था कि आखिर फिल्म के डायरेक्टर, सेट डिजाइनर, कैमरामैन आखिर करते क्या हैं? फिल्म 'हम हैं राही प्यार के' में मेरे साथ दो बच्चे और भी थे इसलिए वहां मैं थोड़ा मस्तीखोर बच्चा था। आमिर खान मुझे बहुत प्यार करते थे। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उस चीज को मैं कैसे बताऊं?
अच्छा तो नई बात करते हैं, आने वाली फिल्म 'लूटकेस' के किरदार के लिए कोई खास तैयारी की?
मैं जब भी कोई किरदार करता हूं तो उससे पहले उसके लेखक और निर्देशक से लंबी बातचीत करता हूं क्योंकि उन्होंने ही उस किरदार को बनाया है। मैं उनसे हर मुद्दे पर चर्चा करता हूं। और, मैं यह भी देखता हूं कि उस किरदार में मैं अपना कितना योगदान दे सकता हूं। कॉमेडी फिल्मों में क्या होता है कि जब आप अपने सह कलाकारों के साथ रिहर्सल करते हैं तो उस किरदार की कुछ और खूबियां निखर कर आती हैं। कॉमेडी के लिए थोड़ा ज्यादा काम करना पड़ता है क्योंकि कागज पर लिखी कॉमेडी को पर्दे पर दिखाना एक्शन के रिएक्शन पर निर्भर करता है।
आपके सह कलाकारों रसिका दुग्गल, विजय राज, गजराज राव और रणवीर शौरी के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
अनुभव बहुत शानदार था। दरअसल, इस फिल्म को करने के मेरे लिए दो कारण रहे। एक तो इस फिल्म की कहानी और दूसरे इसके कलाकार। यह सब इतने अच्छे हैं कि इनके साथ काम करते हुए आपका ऊर्जा का स्तर खुद ब खुद ऊंचा हो जाता है। खासकर जब हम किसी कॉमेडी फिल्म का हिस्सा होते हैं तो ऐसे कलाकार आपकी कॉमेडी में चार चांद लगा देते हैं।