सेना के दस विभागों में महिलाओं के स्थायी कमीशन के आदेश जारी होने के साथ ही बेटियों ने हक और समानता की एक बड़ी जंग जीत ली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के स्थायी कमीशन के पक्ष में फैसला 2011 में ही सुना दिया था, पर सरकारें उनके कमजोर होने की दलीलें देती रहीं।
संघर्ष का सिला: बेटियों ने आखिर जीत ली सेना में स्थायी कमीशन की जंग
- सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में सुनाया था फैसला
- महिलाओं के हक के खिलाफ खड़ी रहीं सरकारें...लेकिन लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता
हाईकोर्ट पहुंची बराबरी की लड़ाई
सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन और बराबरी की लड़ाई जनहित याचिका के जरिये 2003 में दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंची। इसके बाद मेजर लीना गुराव ने 16 अक्तूबर 2006 को याचिका दायर कर महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की मांग की।
सितंबर 2008 में रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी किया कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) से आने वाली महिला अधिकारियों को जज एडवोकेट जनरल और सैन्य शिक्षा कोर में स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। सरकार के इस फैसले को मेजर संध्या यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2003, 2006 और 2008 में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की और 2010 में फैसला सुनाया। अदालत ने एसएससी के तहत भर्ती होने वाली महिलाओं को 14 वर्ष की सेवा पूरी करने पर पुरुषों की तरह स्थायी कमीशन देने को कहा।
महिलाओं को सेवा से जुड़े दूसरे लाभ भी देने के आदेश भी दिए। हाईकोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। दो सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही माना और उसे लागू करने का आदेश दिया।
जब अदालत ने कहा... महिलाओं के लिए ऐसा नजरिया मत रखिए
- सरकार (सुप्रीम कोर्ट में) : सेना के ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां महिलाएं काम करने में सक्षम नहीं होगी।
- सुप्रीम कोर्ट (फटकार लगाते हुए) : महिलाओं के लिए ऐसा नजरिया मत रखिए। आपके पक्ष में लिंगभेद की बू आ रही है और ऐसा करना महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने के बराबर है। सेना में समानता के लिए नजरिया बदलना होगा। महिलाओं को सीमित क्षेत्र तक रखेंगे तो उनकी पदोन्नति पर असर पड़ेगा और संभव है कि वो कर्नल रैंक से आगे नहीं बढ़ पाएंगी। इसी को देखते हुए महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर कमान पोस्ट भी संभालने की जिम्मेदारी दें, जिससे वे अपने काम के दम पर उच्च पदों पर पहुंच सकें।
मार्च 2019 में रक्षा मंत्रालय ने चला नया पैंतरा
मार्च 2019 में रक्षा मंत्रालय ने नया पैंतरा चला। रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी किया कि सेना के 10 विभागों में स्थायी कमीशन मिल सकता है, लेकिन ये भी कहा कि इसका लाभ उन्हें नहीं मिलेगा, जो महिलाएं पहले से सेवा में हैं। मार्च 2019 के बाद से जो महिलाएं सेना में आएंगी, उन्हें ही यह लाभ मिलेगा।
इस फैसले का सीधा असर उन महिलाओं पर पड़ा, जो बराबरी की लड़ाई लंबे समय से लड़ रही थीं। मामला दोबारा अदालत पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कहा कि वह समान नीति लेकर आए। इसके बाद 17 फरवरी 2020 को सेना में शामिल महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला आया।