मणिपुर में चुनाव संपन्न होने के बाद हर किसी को इंतजार था तो बस नतीजों का। इस चुनाव में किसी का 16 सालों का संघर्ष था, तो किसी को मां से मिली विरासत पर अपना हक साबित करना था। और अब नतीजे सभी के सामने हैं। जानिए मणिपुर विधानसभा में कौन जीता और कौन हारा:
इरोम शर्मिला
मणिपुर विधानसभा की थउबल विधानसभा सीट पर परिणाम बेहद रोचक रहा क्योंकि इस सीट पर अफस्पा के खिलाफ 16 साल की लंबी लड़ाई करने वाली इरोम शर्मिला चुनाव मैदान में थीं। इरोम मणिपुर के सीएम ओकराम इबोबी के खिलाफ चुनाव मैदान में थी लेकिन वो हार गईं।
मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017: इरोम शर्मिला को मिली हार, मुख्यमंत्री ने चखा जीत का स्वाद
लेडी आयरन के नाम से जानी जाने वाली इरोम शर्मिला ने कहा भी था कि अगर वो इन चुनावों में हार गईं तो 2019 में वो दोबारा चुनाव लड़ेंगी।
मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017: इरोम शर्मिला को मिली हार, मुख्यमंत्री ने चखा जीत का स्वाद
ओकराम इबोबी सिंह
मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी को अपनी सीट बचाना साख बचाने जैसा था। उनकी थऊबल सीट से उनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला मैदान में थीं। इन्हें इबोबी का तगड़ा प्रतिद्वंदी माना जा रहा था, लेकिन वो हार गईं। जहां ओकराम इबोबी सिंह ने अपनी थऊबल सीट पर जीत दर्ज की वहीं इरोम शर्मीला को सिर्फ 85 वोट ही मिले।
मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017: इरोम शर्मिला को मिली हार, मुख्यमंत्री ने चखा जीत का स्वाद
सूरजकुमार ओकराम
मणिपुर की खंगाबोक सीट इबोबी की परिवार की प्रतिष्ठा की वजह थी। इस बार इस सीट से ओकराम इबोबी के 29 वर्षीय बेटे सूरजकुमार ओकराम चुनावी मैदान में थे और वो जीत गए। इससे पहले इस सीट पर सूरज की मां ओकराम लंधोनी चुनाव लड़ रही थीं। लंधोनी दो बार से लगातार विधायक हैं और उन्होंने ये सीट अपने बेटे सूरजकुमार के लिए छोड़ी थीं। सूरज इस सीट से अपनी चुनावी पारी शुरू कर रहे थे।
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नोंगथोमबम बिरेन सिंह
कभी कांग्रेसी रहे नोंगथोमबम बिरेन सिंह इस बार बीजेपी के टिकट पर मणिपुर विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे और वो वहां से जीत गए। फुटबॉल प्लेयर से पत्रकार और पत्रकार से राजनेता बने बिरेन सिंह के लिए ये चुनाव बेहद खास था। बिरेन सिंह को बीजेपी ने हेनगेंग विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया था।