बता दें कि तूतीकोरिन में प्लांट को लेकर हिंसक वारदात होने का यह पहला मामला नहीं है। बीते एक दशक कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं। नवंबर 2007 में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में इंडोनेशिया की एक कंपनी सालिम ग्रुप के स्पेशल इकॉनोमिक जोन के लिए जमीन अधिग्रहण के विवाद में कई लोगों की मौत हुई। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में 14 मार्च, 2007 को जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस की फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद भी करीब छह महीने तक वहां के लोगों को भारी हिंसा झेलनी पड़ी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भूमि उच्छेद परिषद के सदस्यों के बीच इस हिंसा में कई लोगों की जान चली गई थी।
तूतीकोरिन की तरह, इन जगहों पर भी प्लांट के विरोध में गई थीं जानें
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साल 2007 में तत्कालीन वामपंथी सरकार नंदीग्राम में एक पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री स्थापित करने के लिए भूमि अधिग्रहण की कोशिश की जिसका स्थानीय नागरिकों, दलों और तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया था। जमीन अधिग्रहण करने की एक कोशिश करने में 14 मार्च, 2007 में पुलिस फायरिंग की गई जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी। पूरे साल हिंसा की घटनाओं के जारी रहने के बाद साल 2007, नवंबर में भूमि अधिग्रहण करने की दोबारा कोशिश की गई लोग मारे गए और सात ग्रामीण लापता हो गए थे।
18 जुलाई 2012 को मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में हड़ताल के दौरान हुई हिंसा में जनरल मैनेजर अवनीश देव की जिंदा जल जाने से मौत हो गई थी। वहीं हिंसा में करीब 100 लोग घायल हुए थे। इसमें पुलिसकर्मी भी शामिल थे। इस दौरान परिसर में जमकर तोड़फोड़ हुई थी, जबकि संयंत्र को अधिकतर हिस्सा जलकर खाक हो गया था। इस घटना के बाद प्लांट के 525 श्रमिकों की नौकरी चली गई थी। यह हिंसा एक कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मुद्दे पर शुरू हुई थी। जिसके बाद मारुति के मानेसर प्लांट को एक महीने के लिए बंद करना पड़ा था।
रूस की सहायता से करीब 13 हज़ार करोड़ की लागत से बना कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में है। यहां भी कई बार हिंसक झड़पों की खबर आ चुकी है। स्थानीय लोग शुरू से ही कुडनकुलम प्लांट का विरोध कर रहे थे। स्थानीय लोग सुरक्षा कारणों का हवाला देकर परियोजना को बंद करने की मांग करते आ रहे थे। 2012 में तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास तुतीकोरिन जिले में प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच संघर्ष में गोलीबारी के दौरान एक मछुआरे की मौत हो गई थी। 2016 में इस संयंत्र को देश को समर्पित कर दिया गया था।
टाटा ग्रुप के रतन टाटा ने 18 मई 2006 को घोषणा की थी कि वह पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर में करीब 997 एकड़ जमीन पर लखटकिया कार फैक्टरी बनाएंगे। नैनो को बनाने के लिए कंपनी ने पश्चिम बंगाल के सिगूंर में फैक्ट्री लगाने की योजना बनाई। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा के नैनो कार प्लांट के विरोध में किसानों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में कई लोग घायल हो गए थे। इस विरोध के कारण टाटा के नैनो प्लांट को गुजरात के साणंद में स्थानांतरित करना पड़ा था। 2006 में ममता बनर्जी ने सिंगूर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 26 दिन की भूख हड़ताल भी की थी।