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40 हजार टन जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) का आज भी दंश झेल रहे भोपालवासी

Fri, 30 Nov 2018 01:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Nov 2018 01:48 PM IST
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bhopal gas tragedy effects of methyl isocyanate gas
bhopal gas tragedy

भोपाल गैस त्रासदी के 34 साल हो गए हैं। ठीक 34 साल पहले 2-3 दिसंबर 1984 की मध्यरात को हुई इस दुखद त्रासदी ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया था। त्रासदी के 34 साल बाद भी यूनियन कार्बाइड में दफन जहरीले कचरे के निष्पादन के लिए न तो केंद्र सरकार और न ही मध्य प्रदेश सरकार ने कोई नीति बनाई है। 



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आज भी मंजर याद कर लोगों की रूह कांप जाती है

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- फोटो : Social Media

भोपाल का जय प्रकाश नगर जिसे जेपी नगर के नाम से भी जाना जाता है, ये वो इलाका है जो 34 साल पहले 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात मौत के उस भयावह मंजर का गवाह बना था, जिसे याद करते हुए आज भी यहां रहने वालों की रूह सिहर उठती है। यही वो दिन था जब जेपी नगर के सामने बने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूका) के कारखाने में एक टैंक से अत्यधिक जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) का रिसाव हुआ था। 

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जैसे-जैसे कारखाने की हवा घुलती गई मौत का आंकड़ा बढ़ता गया

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- फोटो : Social Media
3 दिसंबर की सुबह यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर 'सी' में हुए रिसाव से बने गैस के बादल को हवा के झोंके अपने साथ बहाकर ले जा रहे थे और लोग मौत की नींद सोते जा रहे थे। 

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लगभग 40 हजार टन एमआईसी गैस का हुआ था रिसाव

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- फोटो : Social Media

इस हादसे में यूनियन कार्बाइड इंडिया लि. (यूका) की फैक्टरी से करीब 40 टन मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। 

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मिथाइल आइसोसाइनेट का पानी से मिल जाने के कारण हुआ था हादसा

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- फोटो : Social Media

इसकी वजह थी टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पानी से मिल जाना। इससे हुई रासायनिक प्रक्रिया की वजह से टैंक में दबाव पैदा हो गया और टैंक खुल गया और उससे रिसी गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली।

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