फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bhopal Gas Tragedy: What happened in Bhopal that night?

भोपाल गैस त्रासदी: क्या हुआ था भोपाल में उस रात?

Sun, 02 Dec 2018 04:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 02 Dec 2018 04:16 PM IST
विज्ञापन
Bhopal Gas Tragedy: What happened in Bhopal that night?
भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल में गैस त्रासदी पूरी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना है। 03 दिसंबर, 1984 को आधी रात के बाद सुबह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली जहरीली गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली थीं। 

विज्ञापन


उस सुबह यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर 'सी' में हुए रिसाव से बने गैस के बादल को हवा के झोंके अपने साथ बहाकर ले जा रहे थे. और लोग मौत की नींद सोते जा रहे थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हजार लोग मारे गए थे। हालांकि गैरसरकारी स्रोत मानते हैं कि ये संख्या करीब तीन गुना जयादा थी। 
विज्ञापन


मौतों का ये सिलसिला बरसों चलता रहा। इस दुर्घटना के शिकार लोगों की संख्या 20 हजार तक बताई जाती है। 

यह भी पढ़ेंः भोपाल गैस कांड की 34वीं बरसी, समय दर समय पढ़िए दर्दनाक हादसे का सच

विज्ञापन
विज्ञापन

Bhopal Gas Tragedy: What happened in Bhopal that night?
गैस का रिसाव

यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से करीब 40 टन गैस का रिसाव हुआ था। इसकी वजह थी टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पानी से मिल जाना। इससे हुई रासायनिक प्रक्रिया की वजह से टैंक में दबाव पैदा हो गया और टैंक खुल गया और उससे रिसी गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली। 

सबसे बुरी तरह कारखाने के पास स्थित झुग्गी बस्ती प्रभावित हुई। वहां हादसे का शिकार हुए वे लोग जो रोजीरोटी की तलाश में दूर-दूर के गांवों से आ कर वहां रह रहे थे। अधिकांश व्यक्ति निंद्रावस्था में ही मौत का शिकार बने। लोगों को मौत की नींद सुलाने में विषैली गैस को औसत तीन मिनट लगे। 

ऐसे किसी हादसे के लिए कोई तैयार नहीं था। यहां तक कि कारखाने का अलार्म सिस्टम भी घंटों तक बेअसर रहा, जबकि उसे बिना किसी देरी के चेतावनी देना था। हांफते और आंखों में जलन लिए जब प्रभावित लोग अस्पताल पहुंचे तो ऐसी स्थिति में उनका क्या इलाज किया जाना चाहिए, ये डॉक्टरों को मालूम ही नहीं था। 

यह भी पढ़ें: 40 हजार टन जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) का आज भी दंश झेल रहे भोपालवासी

Bhopal Gas Tragedy: What happened in Bhopal that night?
डॉक्टरों की मुश्किलें

शहर के दो अस्पतालों में इलाज के लिए आए लोगों के लिए जगह नहीं थी। वहां आए लोगों में कुछ अस्थाई अंधेपन का शिकार थे, कुछ का सिर चकरा रहा था और सांंस की तकलीफ तो सबको थी। एक अनुमान के अनुसार पहले दो दिनों में करीब 50 हजार लोगों का इलाज किया गया। 

शुरू में डॉक्टरों को ठीक से पता नहीं था कि क्या किया जाए क्योंकि उन्हें मिथाइल आइसोसाइनेट गैस से पीड़ित लोगों के इलाज का कोई अनुभव नहीं था। हालांकि गैस रिसाव के आठ घंटे बाद भोपाल को जहरीली गैसों के असर से मुक्त मान लिया गया था। लेकिन 1984 में हुए इस हादसे से अब भी यह शहर उबर नहीं पाया है। 

यह भी पढ़ें- जिस हादसे में गई थी हजारों लोगों की जान, लेकिन इस परिवार को छू न सकी थी मौत

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed