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समाजवादी साइकिल की दिलचस्प कहानी, कैसे बनी पार्टी का चिन्ह

Mon, 23 Jan 2017 10:43 PM IST
Updated Mon, 23 Jan 2017 10:43 PM IST
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An interesting story of samajwadi party symbol bicycle

समाजवादी साइकिल को कांग्रेस का हाथ मिल गया है। यूपी चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को सफलता मिलेगी, यह फिलहाल कहा नहीं जा सकता है। लेकिन जो साइकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह बनी, और जिसके लिए हाल ही के दिनों में पार्टी के दो धड़ों के बीच भयंकर लड़ाई चली, आखिर उस साइकिल के पीछे कहानी क्या है? कैसे साइकिल समाजवादी विचारधारा की वाहनी बन गई? आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी दिलचस्प कहानी।

समाजवादी साइकिल की दिलचस्प कहानी, कैसी बनी पार्टी का चिन्ह

An interesting story of samajwadi party symbol bicycle
साल 1960, समाजवादी पार्टी का चेहरा और मुखिया मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के इटावा में जब कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्हें रोजाना करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। 

समाजवादी साइकिल की दिलचस्प कहानी, कैसी बनी पार्टी का चिन्ह

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मुलायम के घर की आर्थिक हालात इतनी ठीक नहीं थी कि वह एक साइकिल खरीद पाते। पैसों की कमी के चलते वह मन मसोस कर रह जाते थे और कॉलेज जाने के लिए संघर्ष करते थे। 
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समाजवादी साइकिल की दिलचस्प कहानी, कैसी बनी पार्टी का चिन्ह

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कहते हैं, जो चीज सच्चे मन से चाहो तो सारी कायनात उसे दिलाने में जुट जाती है, कुछ ऐसा ही उस दिन हुआ जब मुलायम सिंह अपने बचपन के दोस्त के साथ उस गांव में पहुंचे।
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समाजवादी साइकिल की दिलचस्प कहानी, कैसी बनी पार्टी का चिन्ह

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आत्मकथा पर आधारित फ्रैंक हुजूर की किताब द सोशलिस्ट के मुताबिक मुलायम अपने बचपन के दोस्त रामरूप के साथ एक दिन किसी काम से उजयानी गांव पहुंचे।
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