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वंदे मातरम पर रार: नहीं बदलेगा कर्नाटक सरकार का रुख, सीएम शिवकुमार बोले- फैसले पर रहेंगे कायम, भाजपा ने घेरा

Thu, 27 Aug 2026 09:03 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 27 Aug 2026 09:03 AM IST
सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस के 1937 के फैसले पर कायम रहने की बात कही। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने इसे संविधान और राष्ट्रगीत का अपमान बताया है। 

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Vande Mataram Karnataka government stance unchanged CM Shivakumar says stick decision BJP targets government
वंदे मातरम पर रार: - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को वंदे मातरम को लेकर एक फैसला लिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पद गाने के कांग्रेस के फैसले का पालन करेगी। वे पार्टी के इस रुख के साथ हैं।

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दरअसल, कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सभी छह पद गाए जाने की बात को खारिज करते हुए शिवकुमार ने कहा कि यह फैसला उनकी जानकारी के बिना लिया गया था। सरकार केवल शुरुआती दो पद ही गाएगी। 

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मुख्यमंत्री ने क्या कहा? 
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से जब स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत को पूरा न गाए जाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मैं अपनी पार्टी की विचारधारा में विश्वास करता हूं। हमने जो भी फैसला किया है, मैं उस पर कायम हूं। हो सकता है कि मेरी जानकारी के बिना या राज्यपाल भवन में ऐसा हुआ हो, लेकिन भविष्य में और सरकार के किसी भी कार्यक्रम में हम उसी बात पर कायम रहेंगे जो हमने पहले तय किया था।'

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कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया? 
भारतीय राजनीति में तुष्टिकरण की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस विविधता में विश्वास करती है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

भाजपा ने क्या कहा? 
मुख्यमंत्री के इस बयान पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जिन्होंने संविधान की गरिमा बनाए रखने की शपथ ली, वे कहते हैं कि मैं राष्ट्रगीत नहीं गाऊंगा। शिवकुमार, आपने संविधान की शपथ ली थी। जब आप राष्ट्रगीत का अपमान करते हैं, तो आप भारत के संविधान का अपमान करते हैं। '

'भारी कीमत चुकानी पड़ेगी'
गौरव वल्लभ ने आगे कहा, 'आप यह सब किसी खास धार्मिक समुदाय को खुश करने के लिए कर रहे हैं। देश की जनता आपको देख रही है। अगर कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति संविधान का अपमान करता है, तो आने वाले समय में, कर्नाटक चुनावों और आम चुनावों में, आपको और आपकी पार्टी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस देश में राष्ट्रगान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।' 


कांग्रेस ने क्या फैसला लिया है? 
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने पिछले हफ्ते 1937 के अपने उस प्रस्ताव को फिर से दोहराया, जिसके अनुसार सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ शुरुआती दो पद ही गाए जाने चाहिए। यह फैसला तब लिया गया जब नए 'वंदे मातरम बिल' में राष्ट्रीय गीत के सभी पद गाना जरूरी कर दिया गया था। इसे गाने के तरीके को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद चल रहा था।

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