अपोलो-11 का उद्देश्य था इसमें सवार तीनों अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, एडविन 'बज' एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस को सुरक्षित चंद्रमा पर पहुंचाने के बाद वापस पृथ्वी पर लाना। 50 वर्ष पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपोलो-11 मिशन के तहत पहली बार चंद्रमा पर किसी इंसान को भेजा था। अपोलो-11 अंतरिक्ष यान को 1969 में अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से सुबह 08:32 बजे लॉन्च किया गया था।
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लैंडिंग से पहले लूनर आर्बिट से पृथ्वी का दृश्य
- फोटो : NASA
ये दोनों अंतरिक्ष यात्री 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा पर रुके थे।
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चांद पर पहुंचने के बाद लूनर मॉड्यूल निरीक्षण करते हुए
- फोटो : NASA
आर्मस्ट्रांग और एडविन के लिए चंद्रमा तक पहुंचने का ये सफर आसान नहीं था। सबसे पहले दोनों अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी से रेडियो संपर्क टूट गया था। इसके बाद ऑनबोर्ड कम्प्यूटर में कई एरर कोड्स आने लगे थे।
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लूनर मॉड्यूल पायलेट एविन "बज़" एल्ड्रिन
- फोटो : NASA
नील आर्मस्ट्रांग और एडविन 'बज' एल्ड्रिन चंद्रमा की जमीन पर उतरे थे। माइकल कॉलिंस बतौर पायलट अपोलो-11 में मौजूद थे।
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लैंडिंग के दौरान उड़ान नियंत्रक
- फोटो : NASA
'द ईगल' में ईंधन की कमी भी सामने आई थी। आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन दोनों ने मिलकर सफलतापूर्वक इन परेशानियों का सामना किया।