सरकार की ओर से पेंशन काटे जाने पर खुद के जीवित होने का प्रमाण देने के लिए रथ पर बैठ कर बरात निकालने वाले गांधरा के 102 वर्षीय बुजर्ग दुलीचंद अब 'मुर्दों' का दरबार लगाएंगे। मतलब जिन लोगों को कागजों में मृत दिखा कर पेंशन काट दी गई है, ऐसे लोग यहां इकट्ठा होंगे। यह दरबार 13 सितंबर को सेक्टर छह स्थित बाग में सुबह 11 बजे लगाया जाएगा। यहां पेंशन काटे जाने से आहत बुजुर्ग, विकलांग, विधवा व मृत घोषित किए लाभार्थी अपनी बात रखेंगे। बरात की तरह इस दरबार में ही नवीन जयहिंद की भूमिका अहम रहेगी।
उन्होंने कहा कि बुजुर्ग की पेंशन मामला उजागर होने के बाद ऐसे और मामले भी सामने आएं हैं। सरकार ने इन्हें मृत घोषित कर पेंशन काट दी। इसी कड़ी में फोन नंबर 7027811811 जारी किया गया है। किसी के साथ इस तरह की नाइंसाफी हो रही है तो वह इस पर संपर्क कर सकता है। इस नंबर पर काफी शिकायतें आई हैं। इसके चलते मुर्दों का दरबार लगाया जा रहा है। यहां उनसे बातचीत कर अगला कदम भी निर्धारित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल दुलीचंद अकेले नहीं हैं, जिन्हें कागजों में मृत दिखाकर पेंशन बंद कर दी गई, बल्कि ऐसे और भी लोग हैं। बुढ़ापा पेंशन और फैमिली आईडी के नाम पर हरियाणा में घोटाला हो रहा है। कभी किसी का नाम गलत करते हैं तो कभी किसी को फैमिली आईडी में मृत दिखा दिया जाता है। प्रदेश में लगभग 15000 केस ऐसे हैं, जिनके साथ ऐसी नाइंसाफी की गई है।
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102 साल के दुलीचंद ने दिया जिंदा होने का सबूत।
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
यह था दुलीचंद का पूरा मामला
रिकॉर्ड में मृत बता गांधरा के 102 वर्षीय बुजुर्ग दुलीचंद की समाज कल्याण विभाग ने पेंशन काट दी थी। विरोध स्वरूप उसने पिछले गुरुवार को ‘थारा फूफा अभी जिंदा है...’ तख्ती पर लिखकर बैंड-बाजे के साथ बरात निकाल कर अनूठा प्रदर्शन किया तो प्रशासन ने महज 24 घंटे में ही शुक्रवार को त्रुटि दूर की और उसे कागजों में जिंदा दिखाया। मुख्यमंत्री ने भी संज्ञान लेते हुए इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
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बग्घी के आगे नाचते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
थारा फूफा अभी जिंदा है... तख्ती पर लिख, बैंड-बाजे के साथ निकाली थी बरात
बुजुर्ग दुलीचंद के पौत्र पवन कुमार ने बताया कि गत 16 अप्रैल को उनके दादा की पेंशन काट दी गई थी। इससे वे काफी आहत व परेशान थे। पहले फैमिली आईडी में चार सदस्य थे। बाद में दादा जी को मृत दिखाकर इसमें तीन सदस्य कर दिए गए। उन्होंने कभी तहसील तो कभी सरपंच व जिला समाज कल्याण कार्यालय के धक्के खाए। इसके बाद भी काम नहीं हुआ। अंतत: इस संबंध में प्रशासन को पेंशन दुरुस्त करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। रोष स्वरूप सिर पर पगड़ी व आंखों पर काला चश्मा पहनाकर, रथ पर दादा जी को बैठाकर मानसरोवर पार्क से एडीसी कार्यालय तक प्रदर्शन किया था।
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102 साल के दुलीचंद ने दिया जिंदा होने का सबूत।
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने भी दिए थे जांच के आदेश
मुख्यमंत्री ने इस मामले में रोहतक के एडीसी को जांच के आदेश दिए हैं। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले को देखा जाएगा कि आखिर पेंशन क्यों काटी गई। एक-दो उदाहरण की वजह से सिस्टम को गलत बताना ठीक नहीं है। सरकार ने सिर्फ गलत जानकारी देने वालों की पेंशन काटी है। अगर किसी की पेंशन गलती से कटी है तो एडीसी लेवल पर इस प्रकार के मुद्दों के निपटान का प्रावधान है।
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बुजुर्ग दुलीचंद व नवीन जयहिंद ने मीडिया से बात करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
15 हजार लोगों के कागजों में जिंदा होने तक पेंशन नहीं लेंगे 102 साल के दुलीचंद
दुलीचंद प्रदेश के 15 हजार लोगों की पेंशन बहाल होने तक अपनी बुढ़ापा पेंशन नहीं लेंगे। शनिवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद के कार्यालय में अपने दादा दुलीचंद के साथ पहुंचे पोते पवन कुमार ने यह घोषणा की थी। इसके साथ ही दुलीचंद के गांव के दिव्यांग राजेंद्र भी सामने आए, जिनको कागजों में मृत दिखाया गया था। बोले, अब उसकी पेंशन भी बहाल होने की उम्मीद जग गई है।