चंडीगढ़ पुलिस ने शनिवार को हरियाणा के एडीजीपी वाई पूरण कुमार आत्महत्या मामले में एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2) (वी) जोड़ दी। मृतक की पत्नी आईएएस अमनीत पी. कुमार और दलित संगठन इस धारा को जोड़ने की मांग कर रहे थे।
एसआईटी ने अब रोहतक में दर्ज एफआईआर का रिकॉर्ड मांगा है ताकि जांच की जा सके कि यह एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई थी। सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड मिलने के बाद पूर्व एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।
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आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार और डीजीपी शत्रुजीत कपूर की फाइल फोटो
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पुलिस द्वारा कमजोर धाराएं लगाने पर यह प्रावधान उन अपराधों पर लागू होता है जिनमें अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर गंभीर चोट या मृत्यु का सामना करना पड़ता है।
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पीजीआई पहुंचे हुए आईजीपी पुष्पेंदर कुमार और एसएसपी कंवरदीप कौर पीजीआई मुर्दा घर से बाहर आते हुए
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वाई पूरण कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार ने एक दिन पहले यूटी एसएसपी कंवरदीप कौर को पत्र लिखकर एफआईआर में कमजोर धाराएं लगाने और मुख्य आरोपियों के नाम हटाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस ने जानबूझकर एफआईआर को कमजोर किया है ताकि प्रभावशाली अधिकारियों को बचाया जा सके।
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वाई पूरण कुमार का शव पीजीआई में ले जाते हुए
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डीएसपी के आदेश पर शव शिफ्ट, एसएचओ को नहीं थी जानकारी
सूत्रों के अनुसार, एसएसपी ने जब सेक्टर-24 चौकी प्रभारी नीरज कुमार से पूछा तो उन्होंने बताया कि शव डीएसपी उदयपाल के आदेश पर शिफ्ट किया गया। सेक्टर-11 थानाध्यक्ष जयवीर राणा ने कहा कि उन्होंने कोई आदेश नहीं दिए।
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वाई पूरण कुमार का शव पीजीआई में ले जाते हुए
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डीएसपी उदयपाल ने सफाई दी कि उन्होंने केवल शव को कागजी कार्रवाई के लिए रिलीज करने की बात कही थी ताकि परिजन दर्शन कर सकें लेकिन मैसेज को गलत समझकर शव पीजीआई भेज दिया गया।