भिवानी में शिक्षिका मनीषा की मौत का मामला पुलिस और सरकार के लिए सिरदर्द बना है तो प्रदेशवासियों के लिए एक अबूझ पहेली बनकर रह गया है। सूबे में पहली बार ऐसा देखा गया है कि 9 दिन पुराने गले सड़े शव का तीसरी बार पोस्टमार्टम हुआ है। विसरा सैंपल के साथ मनीषा के शव से रिसैंपलिंग लेकर अब एम्स दिल्ली से पोस्टमार्टम के रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि इससे पहले मनीषा के शव का पोस्टमार्टम भिवानी जिला नागरिक अस्पताल और फिर दूसरी बार रोहतक पीजीआई में चिकित्सकों के बोर्ड से कराया गया था।
जिसमें विसरा की एफएसएल रिपोर्ट भी आ चुकी है। रिपोर्ट में मनीषा की मौत को जहरीला पदार्थ निगलने की वजह से माना गया है। शव को कुत्तों व जंगली जानवरों द्वारा भी नोंचकर खाया गया है।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी पुलिस की इन्वेस्टिगेशन में क्या चूक रह गई है कि जिसकी वजह से ये मामला अब तक हत्या और आत्महत्या के बीच लटका हुआ है। मनीषा के जहर निगलने से मौत के बाद शव को कुत्तों व जंगली जानवरों ने नोंच खाया था तो मौके पर पुलिस के हाथ कोई सबूत क्यों नहीं लगे।
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शिक्षिका की हत्या के बाद पुलिस जांच करती हुई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस अब तक तीन बार सीन रीक्रिएट कर चुकी है, इसके बावजूद पुलिस अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। हालांकि पुलिस रोहतक पीजीआई में एफएसएल रिपोर्ट पर एक्सपर्ट चिकित्सकों की दलील के आधार पर इस मामले में आत्महत्या का एंगल भी मानकर चल रही है।
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शिक्षिका की हत्या के बाद घटनास्थल का दौरा करते आईजी वाई पूर्ण कुमार और एसपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लेकिन पुलिस की इन्वेस्टिगेशन में इसे शुरुआत से ही हत्या का मामला माना जाता रहा है। इसी वजह से पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि पड़ोसी प्रांतों में भी मनीषा की मौत में न्याय की मांग को लेकर लोगों में आक्रोश फूट रहा है।
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शिक्षिका मनीषा का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोप: पुलिस गंभीर नहीं, बेटी को तलाशने की बजाए चरित्र पर उठाए सवाल
मृतका मनीषा के पिता संजय और दादा रामकिशन का सीधा आरोप है कि पुलिस की भूमिका शुरुआत से ही इस मामले में नकारात्मक रही है। मनीषा 11 अगस्त को गायब हुई थी। तभी से पुलिस ने उसे तलाशने की बजाए बेटी के चरित्र पर ही गंभीर सवाल उठाए।