उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नगर निगम के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। शहर के निचले इलाकों में अब भी काफी ज्यादा जलभराव हो रहा है। जबकि पिछले साल बरसात के बाद से ही इस समस्या को दूर करने के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं।
नगर निगम के जलभराव दूर करने के इंतजाम 'फेल', घंटे भर की बारिश में शहर में हो जाता है पानी-पानी
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स्थिति यह है कि इन निचले इलाकों के घर और दुकानों में भी पानी घुस जा रहा है, जिससे लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। मंगलवार को भी झमाझम बारिश की वजह से शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव हो गया। नगर निगम की टीम नालों की सफाई करने में लगी रही।
दरअसल गोरखपुर की बनावट एक कटोरे की तरह है। बारिश के दिनों में पानी शहर में जमा हो जाता है, जिसे राप्ती तट पर बनाए गए रेगुलेटरों के जरिए बड़ी क्षमता के पंपों से राप्ती नदी में डाला जाता है। वहीं निचले इलाकों में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए शहर के विभिन्न निचले इलाकों में संपवेल बनाए गए हैं। इसके तहत निचले इलाकों के सबसे निचले इलाकों में इकट्ठे पानी को पंप सेट के जरिए मुख्य नालों में डाला जाता है। लेकिन अक्सर इन पंपों को चलाया ही नहीं जाता है, जिसकी वजह से जलभराव की समस्या बनी रहती है।
सबसे ज्यादा दिक्कत रात में बारिश के बाद होती है। दरअसल रात में कितनी भी बारिश हो जाए, लेकिन पंप सुबह ही चलाया जाता है। इससे लोगों के घरों और दुकानों में पानी भर जाता है।
इन स्थानों पर बनाए गए हैं संपवेल
धर्मशाला, भेड़ियागढ़, विष्णुपुरम, दरगहिया टोला, लालडिग्गी पार्क, रसूलपुर भट्टा, महेवा चुंगी, रामनगर, ओमनगर और टिनघर
बेतियाहाता पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने बताया कि निचले इलाकों के जलभराव को दूर करने के लिए संपवेल बनाए गए गए हैं, लेकिन अगर रात भर बारिश हो तो भी संपवेल के पंप को सुबह ही चलाया जाता है। इसकी वजह से काफी समस्या बनी रहती है। बेतियाहाता वार्ड में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए महेवा में संपवेल बनाया गया है।