पूरे देश में वसंत पंचमी का पर्व मंगलवार को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि विद्या की देवी सरस्वती का जन्म इसी दिन हुआ था। वसंत पंचमी के साथ ही ऋतुराज वसंत का भी आगमन होता है। वसंत पंचमी से प्रकृति में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इस दिन से मौसम में सुहाना बदलाव आने लगता है।
वसंत पंचमी 2021: गोरखपुर में दिखा वसंत पंचमी का शानदार नजारा, तस्वीरें देखकर हो जाएंगे खुश
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महीनों ठंड के बाद लोगों को गर्मी का एहसास होने लगता है। वसंत पंचमी पर शहर में अनेक शिक्षण संस्थानों सहित अन्य स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजन कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दिन पतंगबाजी भी खूब होती है। पतंगबाजी के शौकीन लोग खूब पेच लड़ाते हैं।
ऐसे करें पूजन-अर्चन
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार वसंत पंचमी के दिन सुबह स्नानादि के बाद सफेद या पीले वस्त्र पहनकर विधि-विधान से मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें। फिर कलश स्थापित करें। चंदन, सफेद वस्त्र, फूल, दही-मक्खन, सफेद तिल का लड्डू, अक्षत, घृत, नारियल और इसका जल, बेर आदि अर्पित करें। मां सरस्वती के साथ ही भगवान गणेश, शिवजी, विष्णु भगवान और कामदेव की भी पूजा करें।
ऋतुओं का राजा है वसंत
पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि अंग्रेजी कलेंडर के फरवरी, मार्च और अप्रैल माह में वसंत ऋतु रहती है। वसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु कहा गया है। जिस तरह इस ऋतु में प्रकृति में परिवर्तन होता है उसी तरह हमारे शरीर और मन-मस्तिष्क में भी परिवर्तन होता है। इस ऋतु में वसंत पंचमी, होली, रामनवमी, नव-संवत्सर, हनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा आदि पर्व मनाए जाते हैं।
वसंत पंचमी की कथा
पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करके जब देखा तो चारों ओर उदासी का वातावरण नजर आ रहा था, जैसे किसी की वाणी न हो। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उदासी को दूर करने के लिए अपने कमंडल से जल छिड़का। जल की बूंदें पड़ते ही वृक्ष से एक शक्ति उत्पन्न हुई, जो दोनों हाथों से वीणा बजा रही थी। दोनों हाथों में क्रमश: पुस्तक तथा माला धारण किए थी। ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाकर संसार की मूकता और उदासी दूर करने के लिए कहा। तब उस देवी ने वीणा की आवाज से जीवों को वाणी प्रदान की। उस देवी को सरस्वती कहा गया।