फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानिए कौन हैं ये सात कोरोना योद्धा, जो जोखिम की परवाह किए बिना पूरी कर रहे हैं ये चुनौतियां

Thu, 09 Apr 2020 03:12 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Thu, 09 Apr 2020 03:12 PM IST
विज्ञापन
special story for corona warriors in gorakhpur
गोरखपुर के प्रशासनिक अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
सीमित संसाधनों के बीच कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए प्रशासनिक महकमे के कोरोना योद्धा के सामने एक साथ कई तरह की चुनौती है। कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए लॉकडाउन का सख्ती से पालन तो करा ही रहे हैं। लोगों की सेहत और घरों के चूल्हे नियमित जलते रहें, इसका भी इंतजाम कर रहे हैं। 


इन योद्धाओं की दिनचर्या ही पूरी तरह से बदल गई है। दफ्तरों की बजाए सड़कों पर ज्यादा समय बीत रहा है। सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ रहा है तो घर वापसी देर रात को कब होगी पता नहीं। बिस्तर पर गुजर रहे चंद घंटे भी मोबाइल की घंटियों की घनघनाहट और योजना बनाने में कट जा रहे हैं। 
special story for corona warriors in gorakhpur
कमिश्नर जयंत नार्लिकर। - फोटो : अमर उजाला
कमिश्नर जयंत नार्लिकर
गोरखपुर के साथ ही मंडल के अन्य जनपदों देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में लॉकडाउन और कोरोना से संक्रमित हुए लोगों के साथ ही बाहर से आए लोगों को क्वारंटीन किए जाने की समीक्षा में सुबह से जुट जा रहे। रोजाना कम से कम दो जिलों और चार से अधिक तहसीलों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेते हैं। शाम को स्वास्थ्य, प्रशासन समेत विभिन्न विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर कोरोना के प्रभाव को कम करने और घरों में कैद लोगों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत देने पर योजनाएं बनाते हैं।

साथ ही संचालित हो रही व्यवस्था की समीक्षा करना भी नहीं भूलते।  क्वारंटीन या आइसोलेट हुए लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टॉफ भी सुरक्षित घर पहुंचे, इसे लेकर भी कमिश्नर संजीदा हैं। उन्हें भी क्वारंटीन करने के लिए होटलों, लॉज आदि की चारों जिलों में व्यवस्था करा रहे। मंडलीय कंट्रोल रूम में आ रही शिकायतों को जांचते हैं, ताकि लोगों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण हो सके। सोनौली में नेपाल सीमा पर भी इनकी गहरी नजर है।
special story for corona warriors in gorakhpur
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन। - फोटो : अमर उजाला
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन
समय पर खतरे को भांप न केवल बाहर से आए लोगों को क्वारंटीन करवाने में जुटे हैं, बल्कि रोज अलग-अलग मोहल्लों में भ्रमण कर लोगों को लॉकडाउन क्यों जरूरी है, इसकी अहमियत बताते हुए उन्हें घरों में रहने की अपील कर रहे हैं। दफ्तर का समय लोगों को सुरक्षित रखने के साथ ही उन तक सभी जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की योजनाओं में बीत रहा तो बाकी का समय उन्हें अमल करवाने में बीत रहा है। 

घर में बंद लोगों का हाल जानने के साथ ही डीएम को जेल के कैदियों, बाल व महिला संवासिनी गृह में रहने वालों के अलावा सड़क पर रात गुजारने वाले बेसहारा गरीबों की भी पूरी चिंता है। एक तहसील से दूसरे तहसील का दौरा कर देर रात तक क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे लोगों के साथ ही ग्रामीणों तक भी जरूरी सुविधाएं पहुंच रही हैं या नही यह जांच रहे हैं।

कर्नाटक, बंगलूरू, केरल में फंसे गोरखपुर के चार सौ से अधिक लोगों तक खाने आदि की मदद भी पहुंचा चुके हैं। सुबह से देर रात तक सिर्फ एक ही प्राथमिकता है कि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं। गोरखपुर जिले की सरहदों में किसी को कोई दिक्कत न हो इस पर लगातार विचार-विमर्श करते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
special story for corona warriors in gorakhpur
अनुभव सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट। - फोटो : अमर उजाला
अनुभव सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
क्वारंटीन सेंटर में रह रहे लोगों और गरीबों तक भोजन व खाद्यान्न सामग्री पहुंचाने के लिए नेपाल क्लब में बने कम्यूनिटी किचन की जिम्मेदारी निभा रहे। इस किचन से रोजाना 15 से 18 हजार लोगों को गुणवत्तायुक्त भोजना कराया जा रहा। इसकी निगरानी के साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर सड़क पर भूखे मिलने वाले गरीबों को खाना खिला रहे हैं। लोगों को घरों में रहकर खुद के साथ ही परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखने के लिए लोगों के जागरूक करते हैं।
विज्ञापन
special story for corona warriors in gorakhpur
राकेश श्रीवास्तव, एडीएम सिटी। - फोटो : अमर उजाला
राकेश श्रीवास्तव, एडीएम सिटी
शहर की कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रहे। रोज शहर के तमाम इलाकों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित कर रहे कि लॉकडाउन का पूरा पालन किया जा रहा है या नहीं। इसके अलावा दवा मंडी भालोटिया में दवा की मनमानी कीमतों पर अंकुश लगाने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा रहे हैं।

सुबह ही महेवा मंडी पहुंच जाते हैं और अपनी देख-रेख में ठेले और ई-रिक्शा आदि से शहर के विभिन्न इलाकों के लिए सब्जियां भेजवाते हैं। कॉलोनियों का औचक निरीक्षण कर यह भी जांचते हैं कि प्रशासन द्वारा तय रेट पर ही ठेले वाले सब्जियां बेच रहे या नहीं। अधिक कीमत वसूलने पर संबंधित का पास निरस्त कर कई पर कार्रवाई भी कर चुके हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed