फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Saphala ekdashi 2021: सफला एकादशी आज, जानिए कैसे पूजन करने से मिलेगी सफलता

Sat, 09 Jan 2021 01:09 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 09 Jan 2021 01:09 AM IST
विज्ञापन
Saphala ekdashi 2021 date muhurt ekdashi vrat katha and significance
एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला
नये साल की पहली एकादशी आज यानी शनिवार को मनाई जाएगी। पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु एवं लीलाधर भगवान कृष्ण का पूजन करने से श्रद्धालु को सभी कार्यों में सफलता एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Saphala ekdashi 2021 date muhurt ekdashi vrat katha and significance
एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
सफला एकादशी की पूजन विधि
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार सुबह उठने के बाद स्नान करके व्रत करने का संकल्प लें। फिर अपने पूजन घर में गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें। तुलसी के पत्ते, अगरबत्ती, सुपारी, फल और नारियल भगवान विष्णु की प्रिय वस्तुएं हैं। पूजा करने के बाद उन्हें ये अर्पित करें। सफला एकादशी के व्रत की कथा पढ़ें और फिर भोग अर्पित करें। पूजन के दौरान भगवान विष्णु के साथ भगवान कृष्ण की भी पूजा करें। रात्रि जागरण कर भगवान की भक्ति करें।
Saphala ekdashi 2021 date muhurt ekdashi vrat katha and significance
एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
सफला एकादशी की व्रत कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि पद्मपुराण के अनुसार चंपावती नगर के राजा महिष्मान थे। महिष्मान का बेटा लुंभक गलत कार्य करने लगा था। वह सदैव ही पाप कर्म करता रहता था, जिससे राज्य की जनता दुखी थी। लुंभक के कार्यों से परेशान होकर महिष्मान ने उसे अपने राज्य की सीमा से बाहर निकाल दिया। जंगल में रहने के अतिरिक्त लुंभक के पास कोई रास्ता नहीं था क्योंकि उसके अत्याचारों के कारण कोई और भी उसे अपने नगर में प्रवेश नहीं करने दे रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Saphala ekdashi 2021 date muhurt ekdashi vrat katha and significance
एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
लुंभक जंगल में रहकर फल-फूल खाकर ही अपना जीवन व्यतीत कर रहा था। फिर पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की रात अत्यधिक ठंड के कारण लुंभक सो न सका। रात भर जागकर वह अपने पाप कार्यों पर पश्चाताप करते हुए भगवान से क्षमा मांगता रहा। इस दौरान उसने अन्न- जल का एक दाना भी नहीं ग्रहण किया। इस तरह अनजाने में ही लुंभक ने सफला एकादशी का व्रत कर लिया। लुंभक के मन में उस समय किसी तरह का छल नहीं था और वह वाकई अपने किए बुरे कार्यों पर दुखी था।
विज्ञापन
Saphala ekdashi 2021 date muhurt ekdashi vrat katha and significance
एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।

व्रत का परिणाम यह हुआ कि श्रीहरि की कृपा से लुंभक के पिता और राजा महिष्मान ने अपने बेटे को वापस लाने के लिए सैनिक भेजे और उसे पुन: अपने राजमहल में आदर के साथ स्थान दिया। लुंभक में आए परिवर्तन को देखकर उसके पिता ने राज-पाट उसे सौंप दिया और खुद तपस्या करने चले गए। लुंभक ने जीवनभर भगवान विष्णु की पूजा की और अपने राज्य की जनता का ध्यान रखा। जिस प्रकार से सफला एकादशी का व्रत करने से लुंभक को फिर से अपना राजघराना प्राप्त हुआ, उसी प्रकार से जो लोग सच्चे मन से इस एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें भी अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed