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Gorakhpur: जानिए कब और कैसे शुरू हुई गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा?

Sat, 26 Dec 2020 06:22 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Dec 2020 06:22 PM IST
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Gorakhpur UP Gorakhnath Temple: Real untold story behind khichdi mela Gorakhnath mandir gorakhpur
गोरखनाथ मंदिर: बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां के खिचड़ी मेले की प्रसिद्धि देश विदेश में है। मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि किदंवतियों के अनुसार त्रेता युग में अवतारी और सिद्ध गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन के दौरान हिमाचल के कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध ज्वाला देवी मंदिर गए। देवी प्रकट हुईं और गुरु गोरक्षनाथ को भोजन का आमंत्रण दिया।


 

Gorakhpur UP Gorakhnath Temple: Real untold story behind khichdi mela Gorakhnath mandir gorakhpur
गोरखनाथ मंदिर: गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाते श्रद्धालु। (फाइल फोटो) - फोटो : Rajesh Kumar

वहां के तामसी भोजन को देखकर गोरक्षनाथ ने कहा, मैं तो भिक्षाटन से मिले चावल-दाल को ही ग्रहण करता हूं। इस पर देवी ने कहा कि मैं चावल-दाल पकाने के लिए पानी गरम करती हूं। आप भिक्षाटन कर चावल-दाल लाएं।

 

Gorakhpur UP Gorakhnath Temple: Real untold story behind khichdi mela Gorakhnath mandir gorakhpur
गोरखनाथ मंदिर: बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

उन्होंने बताया कि गुरु गोरक्षनाथ वहां से भिक्षाटन करते हुए हिमालय की तराई में स्थित गोरखपुर आ गए। वहां उन्होंने राप्ती और रोहिणी नदी के संगम पर एक मनोरम जगह पर अपना अक्षय भिक्षापात्र रखा और साधना में लीन हो गए।

 

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Gorakhpur UP Gorakhnath Temple: Real untold story behind khichdi mela Gorakhnath mandir gorakhpur
गोरखनाथ मंदिर: गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढाते लोग। (फाइल फोटो) - फोटो : Rajesh Kumar

इस बीच खिचड़ी का पर्व आया, एक तेजस्वी योगी को ध्यानमग्न देखकर लोग उसके भिक्षापात्र में चावल-दाल डालने लगे, पर वह तो अक्षय पात्र था। लिहाजा वह भरने से रहा। लोग इसे सिद्ध योगी का चमत्कार मानकर अभिभूत हो गए। उसके बाद से ही गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

 

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Gorakhpur UP Gorakhnath Temple: Real untold story behind khichdi mela Gorakhnath mandir gorakhpur
गोरखनाथ मंदिर: बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

माह भर चलता है खिचड़ी मेला
द्वारिका तिवारी बताते हैं कि मंदिर परिसर में मकर संक्रांति से शुरू खिचड़ी मेला करीब एक महीने तक चलता है। इस दौरान पड़ने वाले हर रविवार और मंगलवार का अपना महत्व है। इन दिनों और वहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। चूंकि यह उत्तर भारत के बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। लिहाजा खिचड़ी मेले में पूरे उत्तर भारत से लाखों की संख्या में लोग आते हैं। इसमें से अधिकांश नेपाल-बिहार व पूर्वांचल के दूर-दराज के इलाकों से लाखों श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। कुछ बाबा से मांगी मन्नत पूरी होने पर अपनी आस्था जताने आते हैं और कुछ मन्नत मांगने। यह सिलसिला सदियों से जारी है।

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