न्याय के देवता शनिदेव रविवार को मकर राशि में वक्री होने जा रहे हैं। वह 11 अक्तूबर तक उल्टी चाल चलेंगे। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शनि कुंडली के दशम व एकादश भाव का नेतृत्व करते हैं। किसी भी कुंडली के लिए ये दोनों भाव अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में शनि का वक्री होने से विपरीत परिणाम मिलेंगे जो जनमानस के लिए अच्छे नहीं होंगे। इनके वक्री होने से लोगों को सेहत, कुटुंबों एवं आय से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
किस राशि पर कैसा होगा प्रभाव
मेष : व्यवसाय में नुकसान, पिता का सेहत खराब होगा, सीने में परेशानी हो सकती है, नीली व काली वस्तुओं का दान करें, शनिदेव को प्रणाम करें।
वृषभ : व्यवसाय में परेशानी, भाग्य साथ नहीं देगा, पिता की सेहत प्रभावित होगी, नीली और काली वस्तु अपने पास रखें, शनिदेव की पूजा करें।
मिथुन : पूर्व में हुई गलतियों का दंड मिलेगा, सम्मान को ठेस पहुंचेगी, किसी भी चीज को पाने के लिए परिश्रम करना पड़ेगा, शनिदेव की आराधना करें।
कर्क : वैवाहिक जीवन में परेशानी, पहले से तय शादी का प्रस्ताव टूट सकता है, संबंधों में दूरी आएगी, चोट लग सकती है, शनि तत्वों का दान करें।
सिंह : शारीरिक व पारिवारिक स्थिति प्रभावित हो सकती है, जीवनसाथी की सेहत में परेशानी, उदर रोग की समस्या, शनि तत्वों का दान करें।
कन्या : संतान पक्ष पर ध्यान देने की जरूरत, प्रेम की स्थिति मध्यम, संबंधों में परेशानी आ सकती है, शत्रुओं पर विजय मिलेगी, शनिदेव की पूजा करें।
तुला : भूमि, भवन व वाहन की खरीदारी में परेशानी, घर में कलह, मां की सेहत खराब होगी, प्रेम और संतान से परेशानी होगी, शनिदेव का प्रणाम करें।