कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग एंटीजन की अपेक्षा आरटीपीसीआर से जांच का दायरा बढ़ाएगा। शासन से मिले निर्देश के बाद विभाग ने यह फैसला लिया है। मौजूदा समय में एंटीजन किट से जांच ज्यादा की जा रही है। लेकिन एंटीजन वायरस को पकड़ने में अब पहले की अपेक्षा कारगार साबित नहीं हो रहा है। जबकि आरटीपीसीआर की जांच 99 प्रतिशत अभी भी सही मानी जा रही है। ऐसे में अब 70 प्रतिशत जांच आरटीपीसीआर से होंगे।
एंटीजन किट की अपेक्षा आरटीपीसीआर से ज्यादा होगी कोरोना जांच, विशेषज्ञों ने बताई ये वजह
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जानकारी के मुताबिक कोरोना के शुरुआती दिनों में केवल आरटीपीसीआर से ही जांच हो रही थी। आरटीपीसीआर की जांच में पांच से छह घंटे लग रहे थे। इस बीच आईसीएएमआर ने एंटीजन किट से जांच का फैसला लिया। यह किट महज 10 से 15 मिनट में रिजल्ट भी बता देता है। साथ ही इसकी लागत भी काफी कम है।
इसके बाद से एंटीजन किट से ज्यादा जांच होने लगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे एंटीजन किट वायरस को पकड़ने में कमजोर साबित होने लगा। अब किट के पकड़ने की क्षमता बेहद कमजोर हो गई है।
प्रतिदिन हर सीएचसी और पीएचसी से 50 से अधिक सैंपल लेकर आरटीपीसीआर जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भेजे जा रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि आरटीपीसीआर से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। प्रतिदिन 1500 से 2000 सैंपल की जांच की जा रही है।