कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके लोगों में कई तरह के लक्षण आ रहे हैं। सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान लगना, जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना जैसे लक्षणों से लोग परेशान हैं। डॉक्टर इसे पोस्ट कोविड सिम्टम कह रहे हैं। हालांकि, ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। उन्हें बेहतर खानपान और देखभाल की जरूरत है।
संक्रमण से निजात के बाद भी दर्द दे रहा है कोरोना, जानिए कैसे सेहत पर डाल रहा है असर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. महिम मित्तल ने बताया कि कोविड से ठीक होने के बाद मरीजों में थकान, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो रहीं हैं। कई लोगों में स्वाद का न आना और गले में खराश की दिक्कत भी बनी रह रही है। जिन लोगों में कोविड का संक्रमण जितना अधिक है, उनमें ठीक होने के बाद ज्यादा लक्षण दिखाई देंगे। कोविड के हल्के-फुल्के संक्रमण वाले लोगों को कमजोरी महसूस हो रही है।
रुस्तमपुर के शक्तिनगर के रहने वाले 48 साल के आशीष ने बताया कि वह चार दिनों तक वेंटिलेटर पर थे। इसके बाद रिपोर्ट निगेटिव आई तो डिस्चार्ज किया गया, लेकिन इसके बाद थकान, कमजोरी और चक्कर महसूस होने लगा। डॉक्टरों से सलाह ली तो बताया कि यह वायरस के असर की वजह से है। धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। इसी तरह की शिकायत खोराबार के रहने वाले 68 साल के बुजुर्ग राममिलन की भी है। ठीक होने के बाद राममिलन को कम सुनाई देने लगा है।
फेफड़ों पर भी डालता है असर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोविड-19 के मरीजों में एक बड़ी समस्या पल्मोनरी फाइब्रोसिस को लेकर आ रही है, जो फेफड़ों से जुड़ी है। जिन लोगों में कोविड के संक्रमण के कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो जाता है, यानी फेफड़े ठीक से काम नहीं करते, उनमें पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या हो सकती है। इससे फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे मरीजों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है। ज्यादा गंभीर स्थिति में घर में ऑक्सीजन भी लेनी पड़ सकती है।
न्यूरो सिस्टम पर भी डाल रहा है असर
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोविड से ठीक होने के बाद गंभीर मरीजों को लकवा हो सकता है। यह दिमाग पर भी असर कर सकता है। इसकी वजह से घबराहट रह सकती है। इसे पोस्ट डिजीज स्ट्रेस डिसऑर्डर कहते हैं। यह लक्षण कमजोरी में भी आते हैं। वायरस शरीर को कमजोर कर देता है। इसकी वजह से ऐसी परेशानी हो सकती है।