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Exclusive: पहले जूते घिस जाते थे, अब गांव में बैठे हो रही वरासत, जानिए कैसे
Wed, 23 Dec 2020 10:35 AM IST
vivek shukla
अरुण चंद, गोरखपुर।
अरुण चंद, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 23 Dec 2020 10:35 AM IST
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वरासत अभियान के दौरान मौजूद अधिकारी व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला।
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माता-पिता की मृत्यु के बाद जिस पुश्तैनी संपत्ति को अपने नाम दर्ज कराने के लिए लोग महीनों लेखपाल से लेकर तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाते थे, अब वह हाथों-हाथ घर बैठे हो रही है। यह संभव हुआ है मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुए विशेष अभियान की वजह से। गोरखपुर जिले में छह दिन के भीतर 14500 वरासत दर्ज हो चुकी हैं। सदर तहसील क्षेत्र के 46 गांवों में 116 वरासत दर्ज की गई है।
वरासत अभियान।
- फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, समय से वरासत नहीं दर्ज हो पाने की वजह से वारिस तो परेशान हो ही रहे थे, जमीन से जुड़े विवाद भी बढ़ रहे थे। इसे महसूस करते हुए मुख्यमंत्री ने 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक गांव-गांव विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस अभियान में लेखपाल और राजस्व निरीक्षक गांव-गांव जाकर खतौनी पढ़ेंगे। इस दौरान जितने भी लोगों की मृत्यु होने की जानकारी मिलेगी, उनके वारिसों से खुद संपर्क कर उनके जरूरी प्रपत्र लेंगे और वरासत ऑनलाइन दर्ज करेंगे। यदि कोई गांव से बाहर है तो उससे भी फोन पर संपर्क करेंगे। आवेदक चाहे तो अपने भी घर बैठे या नजदीक के किसी भी जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। अभियान के दौरान जितने भी अविवादित मामले हैं, उनमें वरासत दर्ज की जाएगी। अगर लेखपाल नहीं मिल रहा है या कोई इस काम के लिए घूस मांग रहा है तो उसकी शिकायत तहसीलदार, एसडीएम और डीएम से लेकर सीएम तक से की जा सकेगी।
वरासत अभियान।
- फोटो : अमर उजाला।
सभी तहसीलों में जारी किया गया है रोस्टर
लोगों को दिक्कत न हो और लेखपालों की जिम्मेदारी तय की जा सके, इसलिए डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के निर्देश पर सभी तहसीलों में लेखपालों की रोस्टरवार ड्यूटी लगाई गई है। यानी किस गांव में किस दिन कौन लेखपाल जाकर वरासत का काम करेगा उसका निर्धारण कर दिया गया है।
लोगों को दिक्कत न हो और लेखपालों की जिम्मेदारी तय की जा सके, इसलिए डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के निर्देश पर सभी तहसीलों में लेखपालों की रोस्टरवार ड्यूटी लगाई गई है। यानी किस गांव में किस दिन कौन लेखपाल जाकर वरासत का काम करेगा उसका निर्धारण कर दिया गया है।
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वरासत अभियान।
- फोटो : अमर उजाला।
एसडीएम, तहसीलदार करेंगे निगरानी
डीएम ने सभी एसडीएम और तहसीलदार को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी तहसीलों में रोस्टर के मुताबिक औचक निरीक्षण कर यह जांचेंगे कि संबंधित लेखपाल-राजस्व निरीक्षक गांव में गए हैं या नहीं। साथ ही गांवों में जाकर क्रास चेक भी करेंगे कि कोई ऐसा आवेदक तो नहीं छूट गया, जिसकी वरासत के मामले में कोई विवाद नहीं है, लेकिन लेखपाल ने उसकी वरासत नहीं दर्ज की। मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल और सदर तहसीलदार डॉ संजीव दीक्षित ने पिपराइच क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में जाकर यह जांच की।
डीएम ने सभी एसडीएम और तहसीलदार को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी तहसीलों में रोस्टर के मुताबिक औचक निरीक्षण कर यह जांचेंगे कि संबंधित लेखपाल-राजस्व निरीक्षक गांव में गए हैं या नहीं। साथ ही गांवों में जाकर क्रास चेक भी करेंगे कि कोई ऐसा आवेदक तो नहीं छूट गया, जिसकी वरासत के मामले में कोई विवाद नहीं है, लेकिन लेखपाल ने उसकी वरासत नहीं दर्ज की। मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल और सदर तहसीलदार डॉ संजीव दीक्षित ने पिपराइच क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में जाकर यह जांच की।
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वरासत अभियान।
- फोटो : अमर उजाला।
अभियान के बाद भी मामला बचा तो तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ चेताया है कि यदि अभियान खत्म होने के बाद भी कहीं वरासत के अविवादित मामले बचे रह गए तो संबंधित लेखपाल से लेकर निगरानी करने वाले तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम और डीएम तक की जिम्मेदारी तय कर उनपर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ चेताया है कि यदि अभियान खत्म होने के बाद भी कहीं वरासत के अविवादित मामले बचे रह गए तो संबंधित लेखपाल से लेकर निगरानी करने वाले तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम और डीएम तक की जिम्मेदारी तय कर उनपर कार्रवाई की जाएगी।