जैसा नाम, वैसा काम, इसे चरितार्थ कर रही हैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के अलीनगर क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता आशा देवी। आशा अपने क्षेत्र के 37 टीबी मरीजों को ‘चैंपियन’ बना चुकी हैं। इनमें दो मरीज मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) के हैं। आशा देवी ने इन सबको लगातार नौ महीने तक दवा खिलाई। 2017 से आशा कार्यकर्ता के तौर पर स्वास्थ्य सेवा से जुड़ीं आशा देवी की पहचान टीबी की एक अच्छी ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (डाट्स प्रोवाइडर) के रूप में है।
महिला दिवस पर विशेष: जैसा नाम वैसा है इनका काम, 37 मरीजों को टीबी चैंपियन बना चुकी हैं 'आशा'
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आशा देवी के मुताबिक, टीबी मरीजों का इलाज बीच में न छूटे और उन्हें उचित सलाह मिले, इसे मिशन के तौर पर लिया है। दवा का कोर्स पूरा करना कितना महत्वपूर्ण है, आशा ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया। बताया कि क्षेत्र के एक मरीज ने दवा बीच में छोड़ दी। अब उसकी बहू को भी टीबी की बीमारी हो गई है। बताया कि घर जाकर दवा पहुंचाते हैं। मरीजों को बताते हैं कि खांसते-छींकते समय मास्क या कपड़े का इस्तेमाल करें।
टीबी चैंपियंस को देख कर मिलती है संतुष्टि
आशा देवी कहती हैं कि नेपाल निवासी काम के सिलसिले में गोरखपुर आया। जांच में टीबी की पुष्टि हुई। इस मरीज को दवा की पूरी खुराक दी गई। अब वह स्वस्थ है। जब भी मिलता है, सम्मान से नमस्कार करता है। इससे आत्म संतुष्टि मिलती है।
नौ साल के मासूम को भी दिलाई टीबी से मुक्ति
नौ वर्षीय टीबी चैंपियन की मां लालती भी आशा के सेवाभाव से प्रभावित हैं। लालती कहती हैं कि आशा ने निशुल्क दवा घर पहुंचाई। एक दिन का गैप नहीं हुआ। अब बेटा पूरी तरह से स्वस्थ है। आशा अक्सर बेटे का हालचाल लेती हैं।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाले सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रयास अनुकरणीय हैं। आशा देवी बेहतर काम करके एक नजीर पेश कर रही हैं। ऐसी महिलाओं को सलाम है।