राप्ती नदी भी रविवार की देर शाम खतरे का निशान पार कर गई। इससे सहजनवां और सदर तहसील क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। धान सहित अन्य फसलें डूब गईं। संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ गया। आवागमन बाधित है। बहरामपुर गांव को खाली कराया जा रहा है।
गोरखपुर बाढ़: राप्ती नदी ने पार किया लाल निशान, रोहिन ने धारण किया रौद्र रूप
अब तक 60 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, एक गांव से संपर्क कटा
सरयू और कुआनो नदी पहले ही खतरे का निशान पार कर चुकी हैं। रविवार को प्रशासन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसके मुताबिक 20 नए गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शनिवार को बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या जहां 40 थी, वह रविवार को बढ़कर 60 हो गई है। बाढ़ का कहर सबसे ज्यादा कैंपियरगंज तहसील क्षेत्र में है। इसी क्षेत्र से होकर रोहिन नदी बहती है। इस क्षेत्र के 56 गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है। इसी तरह गोरखपुर शहर से होकर बहने वाली राप्ती नदी भी देर शाम तक खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। लिहाजा, सहजनवां और सदर तहसील क्षेत्र के चार गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। गोर्रा व आमी नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। हालांकि, दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं।
बलरामपुर में तटबंध टूटने से कम हुआ पानी का दबाव
बलरामपुर में राप्ती नदी का तटबंध टूट गया है। इससे पानी का दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन सोमवार को भी नेपाल में बारिश की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो दिक्क्त बढ़ेगी। दरअसल, श्रावस्ती बैराज से शनिवार को 1.60 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इससे सिंचाई विभाग के अफसर चिंतित थे, लेकिन बलरामपुर में तटबंध टूटने से थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि अब श्रावस्ती बैराज का डिस्चार्ज 90 हजार क्यूसेक रह गया है। इससे राप्ती नदी में पानी बढ़ने का दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि, जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है।
अब तक 4,765 लोग बाढ़ से प्रभावित
आवागमन के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों में 22 नावें लगाई गई हैं। अब तक 4,765 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 1781 हेक्टेयर फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग के इंजीनियरों से लेकर कर्मचारी लगे हैं। बंधों की निगरानी की जा रही है। जो भी संवेदनशील स्थान हैं, वहां पर कटान रोकने के इंतजाम किए गए हैं।
कटान का खतरा बढ़ा
सबसे अधिक तबाही रोहिन नदी मचा रही है। गाहासाड़-कोलिया तटबंध पर पानी का जबरदस्त दबाव है। कटान का खतरा बना हुआ है। गिट्टी, बालू की बोरी और कैरेट गिराए गए हैं। कटान रोकने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
नदियों का जलस्तर
| नदी-स्थान | जलस्तर | खतरे का निशान |
| घाघरा अयोध्या | 92.970 | 92.730 |
| घाघरा बरहज | 67. 550 | 66.500 |
| राप्ती बर्डघाट | 75.170 | 74.980 |
| रोहिन त्रिमुहानी | 83.570 | 74.440 |
| गोर्रा पिंडरा | 70. 100 | 70.500 |
| कुआनो चंद्रदीप घाट | 89.260 | 88.840 |