कोविड-19 के गंभीर मरीजों के ठीक होने के बाद भी कुछ अंगों पर वायरस का असर रह जा रहा है। फेफड़ों के अलावा किडनी, लिवर, हृदय, तंत्रिका तंत्र, पाचन तंत्र को वायरस नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि इन अंगों की रिकवरी तेजी से होती है, लेकिन फेफड़ों पर असर ज्यादा रहता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कोरोना वायरस को हल्के में न लें। वरना ठीक होने के बाद भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कोरोना से ठीक होने के बाद इन अंगों पर पड़ रहा असर, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे हैं सलाह
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फेफड़ों पर बन रहे धब्बों से सांस लेने में परेशानी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना का फेफड़ों पर असर ज्यादा होता है। करीब 50 प्रतिशत मरीजों के ठीक होने के बाद भी फेफड़ों में पैच दिख रहे हैं। कुछ मरीजों में पल्मोनरी फ्राइब्रोसिस की समस्या है। इससे फेफड़ों का एक हिस्सा काम नहीं करता है। मरीज को जल्दी-जल्दी सांस लेनी पड़ती है।
तंत्रिका तंत्र पर डालता है असर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि कोविड की वजह से नसों में सूजन की समस्या आ रही है। इसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में ब्लड दिमाग को नहीं पहुंचता है। इसका असर तंत्रिका तंत्र पर पड़ने से 80 प्रतिशत मरीजों की सूंघने और स्वाद की क्षमता पता नहीं चल पाती है। कोरोना नवर्स सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा है। अगर बोलने में परेशानी हो रही है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि जिन लोगों को पहले से शुगर या हृदय रोग से संबंधित बीमारी है, उन्हें कोरोना होने पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना की वजह से हृदय की मसलस कमजोर हो जाते हैं। इससे हृदय की पंपिंग की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। कुछ मामलों में हृदय की संरचना में बदलाव भी देखने को मिले हैं। ऐसे में समय से इलाज जरूर कराएं।
किडनी पर दवाइयों का असर ज्यादा
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि 20 से 25 प्रतिशत कोविड के मरीजों के किडनी पर असर होता है। इसकी वजह यह है कि फेफड़ों में संक्रमण और क्लाटिंग रोकने के लिए जो एंटी बॉयोटिक और एंटीक्लाटिंग दवाएं दी जाती हैं, उससे किडनी को नुकसान पहुंचता है। अगर मरीज रिकवरी कर जाता है तो दिक्कतें नहीं होती हैं।