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विसर्जित हुई आस्था भीः गोरखपुर में प्रतिमाओं को दी 'जलसमाधि'...जेवर-नकदी को मची कूदा-फांदी

Mon, 14 Oct 2024 01:40 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Mon, 14 Oct 2024 01:40 PM IST
सार

प्रतिमाओं से निकली बांस-बल्ली किनारे रखी थी। कई महिलाएं उसपर चढ़कर जेवर और कपड़े निकाल रही थीं। लकड़ी को कुछ बेचने की तैयारी में थे तो कुछ घरों में उपयोग के लिए। लकड़ी इकट्ठा कर रहे दिवाकर ने बताया कि वह इसे घर में उपयोग के लिए लेकर जा रहे हैं।

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After immersion of idol in Gorakhpur, people started taking out jewelery and cash from the idol of the mother
मूर्ति विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
आस्था और श्रद्धा के साथ नौ दिनों तक मां दुर्गा की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया, लेकिन जल में विसर्जन के दिन कुछ लोग सभी मर्यादाएं भूल गए। राप्ती तट के किनारे बनाए गए पोखरों में जैसे ही प्रतिमाओं को जलसमाधि दी गई, पोशाक, जेवर, नकदी और शस्त्र लूटने के कूदफांद और छीनाझपटी शुरू हो गई।

 
After immersion of idol in Gorakhpur, people started taking out jewelery and cash from the idol of the mother
मूर्ति विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
कलश और पूजा की सामग्री बिखरी पड़ी थी और विसर्जन करने वाले भी प्रतिमाओं से निकले मलबे को कुचलते जाते नजर आए। श्रद्धा और आस्था के इस विसर्जन को जिसने भी देखा, उसका मन दुखी हो गया। एकला बंधे के पास बने कृत्रिम पोखरे में मूर्तियां विसर्जित की जा रही थीं। सुबह से महिलाएं, बच्चे और युवा पहुंचकर प्रतिमाओं को खींचकर किनारे ला रहे थे। कोई मूर्ति से कपड़े निकाल रहा था तो कोई लकड़ी।
After immersion of idol in Gorakhpur, people started taking out jewelery and cash from the idol of the mother
मूर्ति विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
कई महिलाएं आभूषणों को निकालने में जुटी थीं। घाट पर प्रतिमाओं और कलश सहित अन्य पूजन सामग्री को लूटने की होड़ रही। शाम चार बजे नगर निगम के कर्मचारी सफाई में जुट गए। जेसीबी की मदद से पोखरे से लकड़ी और अन्य सामान निकाले जा रहे थे। सफाई में निकले सामान को किनारे रख रहे थे। छीनाझपटी करने वालों को मना भी कर रहे थे पर वे मानने को कहां तैयार थे। सामानों को ले जाने के लिए कुछ तो ठेला लेकर पहुंच गए।
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After immersion of idol in Gorakhpur, people started taking out jewelery and cash from the idol of the mother
मूर्ति विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
महिलाएं खोज रही थीं जेवर
प्रतिमाओं से निकली बांस-बल्ली किनारे रखी थी। कई महिलाएं उसपर चढ़कर जेवर और कपड़े निकाल रही थीं। लकड़ी को कुछ बेचने की तैयारी में थे तो कुछ घरों में उपयोग के लिए। लकड़ी इकट्ठा कर रहे दिवाकर ने बताया कि वह इसे घर में उपयोग के लिए लेकर जा रहे हैं।
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After immersion of idol in Gorakhpur, people started taking out jewelery and cash from the idol of the mother
मूर्ति विसर्जन - फोटो : अमर उजाला
कुछ महिलाएं और बच्चे बांस सहित ढांचे के अन्य सामान ले जाते नजर आए। नौसड़ की दुलारी देवी ने बताया कि प्रतिमा से निकले वस्त्र को वह घर में इस्तेमाल करेंगी।

नथिया और पैसे के लिए डुबकी मारते रहे बच्चे
देवी प्रतिमाओं में बहुत सारे लोग सोने की नथिया पहनाते हैं। नथिया और पैसे की तलाश में बहुत सारे बच्चे पानी में डुबकी मारते नजर आए। प्रतिमा के पास पैसे की तलाश कर रहे राजू ने बताया कि दो घंटे में वह 115 रुपये निकाल चुका है। उसके साथ उसका दोस्त भी है।
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