गोरखपुर जिले में तैनात प्रशासनिक, पुलिस अफसर व शिक्षाविदों ने शिक्षक दिवस (पांच सितंबर) पर अपने-अपने गुरुओं को याद किया। साथ ही अपनी स्मृतियों को साझा करके पुरानी यादों में खो गए। ज्यादातर ने कहा कि गुरुओं के बताए रास्ते पर चले और अपना मुकाम हासिल कर लिया। यह मूल मंत्र हर व्यक्ति को याद रखना चाहिए। माता-पिता के अलावा शिक्षक ही ऐसे होते हैं, जो कि कठिन रास्ते पर चलने का आसान तरीका बताते हैं। इससे भविष्य संवरता है।
Teachers' Day: प्रशासनिक, पुलिस अफसर व शिक्षाविदों ने गुरुओं को किया याद, बोले- जीवन को आसान बनाते हैं शिक्षक
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आसान भाषा में पढ़ाई से बढ़ी बायोलॉजी में रुचि
11वीं में बायोलॉजी की क्लास कर रहा था। शिक्षक एसके सयाल इतनी आसान भाषा में पढ़ाने लगे कि इस विषय में रुचि और बढ़ गई। नतीजा रहा कि मेडिकल फील्ड को चुन लिया। एमबीबीएस करके डॉक्टर बना। शिक्षक के बताए राह पर चला तो कोई दिक्कत नहीं आई। पढ़ाई पर ध्यान दिया और लक्ष्य की तरफ बढ़ते चले गए। डॉक्टर बनने के बाद लगा कि कुछ और करना चाहिए। लिहाजा, प्रशासनिक सेवा की तैयारी की। अब आईपीएस बनकर लोगों के दुख-दर्द को बांट रहा हूं। -डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी
गणित का आसान फार्मूला हर समस्या का समाधान
वैसे तो जीवन में सबसे बड़े शिक्षक माता-पिता ही हैं। लेकिन, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में शिक्षक थे सदाशिव गुप्त, 10 वीं में गणित पढ़ाते थे। कठिन सवालों को सरल तरीके से हल करना सिखाते थे। उनकी अपनी तकनीक बहुत ही सरल थी। यह मेरे जीवन में बड़ा सबक था। कठिन से कठिन समस्या का समाधान उनके ही फार्मूले पर आसानी से कर लेता हूं। मेरे लिए उनकी सीख हमेशा प्रेरणा की काम करती है। -प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एमएमएमयूटी
शिक्षकों ने रखी मजबूत नींव
प्रारंभिक शिक्षा सेंट्रल स्कूल, दिल्ली से हुई है। मेंटल मैथमेटिक्स की पढ़ाई होती थी। खड़े होकर क्लास में सवालों का जवाब देते थे। इससे मेरा गणित बहुत तेज हो गया। पुरी मैडम थीं, जो साइंस बहुत अच्छा पढ़ाती थीं। थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल करवा कर समझाती थीं। अंग्रेजी की टीचर वसुंधरा सप्रे मैडम थीं। बेहद अनुशासित थीं। सबने अपनी कुशलता से मेरी नींव इतनी मजबूत कर दी थी कि जिसका फायदा हायर एजुकेशन में हुआ। -अशोक कुमार मिश्र, महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे
सीनियरों के मार्गदर्शन से मिली कामयाबी
प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातक स्तर की शिक्षा तक कई ऐसे गुरु मिले, जिन्होंने मुझे विशेष सांचे में ढाल दिया। इससे भविष्य की राह आसान हुई। स्नातक के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी में कई सीनियरों का मार्गदर्शन मिला, जिन्हें सीनियर गुरु कह सकते हैं। भविष्य को संवारने में हर शिक्षक की भूमिका अहम होती है। माता-पिता का आशीर्वाद भी काम आया है।-पवन अग्रवाल, सीईओ, गीडा