वैसे तो किताबें पढ़ना अब लोगों की आदत नहीं रही। कहानियां तक लोग न पढ़ रहे हैं, न देख रहे हैं, बल्कि कान में ईयर फोन लगाकर सुन ज्यादा रहे हैं। लेकिन, मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों इसके बावजूद एक किताब के चर्चे खूब हैं और ये किताब है, ‘जीएसटी फॉर दे लेमैन’। फिल्म इंडस्ट्री के हर उस शख्स के पास इन दिनों ये किताब देखने को मिल जाती है जिसके वेतन का भुगतान बिल बनाकर भेजने पर होता है और जिसे अपने बिल में जीएसटी भी चार्ज करना होता है।
‘खिचड़ी’ की अभिनेत्री ने इस तरीके से बचाया लाखों का टैक्स, आपको भी हैरान कर देंगी ये अनोखी जानकारियां
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जीएसटी को लेकर बड़े बड़े सितारों, निर्माताओं व तकनीशियनों ने दूसरे बड़े उद्योगपतियों की तरह चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) नियुक्त किए हुए हैं, लेकिन असल दिक्कत है उन लोगों की जिनके पास इसके लिए अलग से बजट नहीं है। किताब ‘जीएसटी फॉर दे लेमैन’ ऐसे ही लोगों के खूब काम आ रही है। रोटेशन में पैसा पाने वालों या फिर अपनी महीने की मेहनत की मजदूरी इनवॉयस बनाकर ही पाने वालों के ये किताब खूब काम आ रही है।
चर्चित धारावाहिक ‘खिचड़ी’ फेम अभिनेत्री रिचा भाद्रा कहती हैं, ‘मैंने और मेरे पति ने हाल ही में मिलकर एक नया घर खरीदा है और मैं ये बात सबको बताना चाहती हूं कि इस किताब से मुझे क्या फायदा हुआ। ‘जीएसटी फॉर दे लेमैन-हाउ इट इम्पैक्ट्स योर डेली लाइफ’ पढ़ने के बाद न सिर्फ जीएसटी को लेकर मेरे दिमाग के सारे जाले साफ हो गए बल्कि इसकी वजह से हमने करीब 12-15 लाख रुपये की बचत भी कर ली। मैं तो कहती हूं कि ये किताब हर शख्स को खरीदनी चाहिए। आखिर कितनों को पता होगा कि अगर बिल्डिंग को कंपलीशन सर्टिफिकेट मिल गया है तो घर खरीद पर जीएसटी नहीं लगता है!’
‘जीएसटी फॉर दे लेमैन-हाउ इट इम्पैक्ट्स योर डेली लाइफ’ किताब के चर्चे मुंबई की तमाम दूसरी संस्थाओं में भी देखे जा सकते हैं। इस किताब की खासियत ये भी है कि इसमें उद्योग के हिसाब से सवालों के जवाब अलग से दिए गए हैं। छोटा कारोबार करने वालों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और ई कॉमर्स चलाने वालों की हर दिक्कत का जवाब इस किताब में देने की कोशिश की गई है। चर्चित लेखक अमर नाथ झा भी मानते हैं कि इस किताब की खासियत इसके सरल होने में ही है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अपेक्षा सोलंकी की लिखी इस किताब की तारीफ भारत सरकार के कस्टम विभाग के प्रधान मुख्य आयुक्त विवेक जौहरी ने भी की है। वह लिखते हैं, ‘जीएसटी आमतौर पर बहुत ही बोरिंग और तकनीकी विषय माना जाता है लेकिन अपेक्षा की ये किताब सारी उलझनों को बहुत ही अनोखे तरीके से सुलझा देती है।’ देश की चार बड़ी अकाउंटिंग कंपनियों में काम कर चुकीं अपेक्षा ने ये किताब आम आदमी की मदद करने के लिए तकनीकी ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करने के अपने 16 साल पुराने सपने को पूरा करने के लिए लिखी है।