टीवी के जाने-माने अभिनेता शार्दुल पंडित ने रियलिटी शो 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी है। एक कलाकार के रूप में उनके अंदर कई गुण हैं। उनकी शुरुआत चित्रकारी से हुई और बाद में उन्होंने टीवी पर एंकरिंग की। उसके बाद वह रेडियो जॉकी भी बने और अब टीवी पर अभिनय भी करते हैं। इतना सब कुछ करने के बाद अब वह 'बिग बॉस' का भी हिस्सा बन गए। इस शो में जाने का शार्दुल का उद्देश्य है कि वह इस शो से अपनी एक बड़ी पहचान बनाना चाहते हैं। बिग बॉस के घर में दाखिल होने से पहले अमर उजाला ने उनसे ढेरों बातें कीं।
Bigg Boss 14 Wild Card: आरजे शार्दूल को नहीं भूली सलमान से पहली मुलाकात, 'अमर उजाला' से यूं बयां किया किस्सा
लगभग ढाई से तीन हफ्ते बाहर बैठकर आपने घर के अंदर खेल रहे लोगों का विश्लेषण तो कर ही लिया होगा! और उनके बारे में कुछ जानकारियां भी इकट्ठी कर ली होंगी! तो अब तक आपने किसके बारे में क्या राय बनाई है?
कुछ ही हफ्तों का खेल देखकर किसी के बारे में भी कोई राय बना लेना गलत बात है। खेल के नजरिए से भी सोचा जाए तो मैं समझता हूं कि जो भी प्रतियोगी घर के अंदर खेल रहे हैं, उन्होंने अब तक अपने सारे पत्ते तो बिल्कुल नहीं खोले होंगे! एक आदमी के रूप में भी इतनी जल्दी लोगों का विश्लेषण करना बहुत मुश्किल है। एक खिलाड़ी का पता लगाया जा सकता है लेकिन एक आदमी का नहीं। मुझे लगता है कि मुझे अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। न कि दूसरों पर। और मैं व्यक्तिगत तौर पर तो किसी पर भी हमला नहीं करने वाला हूं।
क्या यह सच है कि आप एक रेडियो जॉकी होने के साथ गायक भी हैं? अगर ऐसा है तो आपकी घर के कुछ प्रतियोगियों से काफी जमेगी!
मैं संगीत का आठवां सुर हूं इसलिए मुझसे ताल मिलाने के लिए राहुल वैद्य और जान कुमार सानू को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। (हंसते हुए) न जाने कहां से यह एक अफवाह फैल गई है कि मैं एक गायक हूं। लेकिन, मैं आपको बता दूं कि यह बिल्कुल गलत है। मैं कोई गायक नहीं हूं। लेकिन, अगर ऐसा मान ही लिया गया है तो मैं बिग बॉस में गाऊंगा जिससे कि टीआरपी कुछ अलग ही स्तर की आए। इसमें एक बात बिल्कुल सही है कि मैं एक रेडियो जॉकी भी रहा हूं। मेरे करियर की शुरुआत रेडियो जॉकी से ही हुई थी। उस वक्त में 19 साल का था। तो पढ़ाई के साथ-साथ रेडियो में भी मैं काम कर रहा था। उस वक्त मुझे प्रेम शब्द का मतलब भी नहीं पता था तब रेडियो में मुझे लोगों की प्रेम समस्याएं सुलझाने के लिए बैठा दिया गया था।
आपके करियर की शुरुआत अचानक से एक रेडियो जॉकी बनने से कैसे हो गई? किस तरह पहुंचे आप वहां तक?
यह उस समय की बात है जब मैं अपने शहर इंदौर में लोकल टेलीविजन पर एंकरिंग करता था। तब रेडियो मिर्ची की शुरुआत एक लोकल चैनल के रूप में ही शहर में हो रही थी और वह कुछ हुनरमंद लोगों की तलाश में थे। मुझे लगा कि मुझे भी इसके लिए टेस्ट देना चाहिए। मैंने भी इसकी लिखित परीक्षा दी और बाद में मेरा सामान्य ज्ञान भी जांचा गया। एंकरिंग मैं पहले से ही कर रहा था इसलिए बाकी की चीजों में मुझे ज्यादा दिक्कत हुई नहीं। और मुझे रेडियो जॉकी बना दिया गया।
टेलीविजन पर एंकरिंग शुरू करने का आपका क्या मकसद था?
यह भी उसी समय की बात है जब मैं 18 से 19 साल का ही हूंगा। मैं चाहता था कि अपने जेब खर्च के लिए मैं कुछ ऐसा करूं, जिससे कि मुझे घर वालों के ऊपर ज्यादा आश्रित न रहना पड़े। उस वक्त में पेंटिंग करता था और बच्चों को भी सिखाता था। इसके अलावा मैं कुछ और कोचिंग भी दिया करता था। उसी दौरान मुझे लोकल टेलीविजन पर एंकरिंग करने का भी मौका मिला तो उसमें भी मैंने हाथ आजमाया। मैंने सोचा कि अगर दिन के तीन से चार घंटे पढ़ाई के अलावा अगर मैं ऐसी चीजों में भी काम करूं और इनसे पैसे कमाऊं तो इसमें बुराई क्या है?