मनोरंजन की दुनिया में सब कुछ मुनाफे के लिए ही होता हो, ऐसा भी नहीं है। सोनू सूद जैसे अभिनेता कर्ज लेकर दूसरों की मदद कर रहे हैं। महावीर जैन जैसे निर्माता मजदूरों की खुराक का इंतजाम बिना किसी प्रचार प्रसार के लिए करते रहते हैं और राजस्थान से आईं एक अभिनेत्री भी हैं मीनल वैष्णव, जिनकी हिम्मत के चलते देश के तमाम गांवों की युवतियां और महिलाएं बदलाव की नई बयार देख रही हैं। उत्तर प्रदेश के बैरिया गांव की सुमन जैसी तमाम महिलाएं को उन्होंने अपने एक खास किरदार के जरिए प्रशिक्षित किया है और इस परिवर्तन के चलते ये महिलाएं अब खुलकर अपनी बेटियों से यौन शिक्षा, मासिक धर्म और तमाम दूसरे मुद्दों पर पर बातें कर सकती हैं। बिना झिझक के। उनके इस अभियान का नाम है, ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’।
2 of 6
मीनल वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’ दरअसल एक टीवी सीरीज है। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया यानी कि पीएफआई ने ये मुहिम शुरू की है। चर्चित फिल्म व रंगमंच निर्देशक फिरोज अब्बास खान के निर्देशक में बनी इस सीरीज के डेढ़ सौ से ज्यादा एपीसोड दूरदर्शन पर प्रसारित हो चुके हैं। ओटीटी पर भी इसे लोग खूब देख रहे हैं और यूट्यूब तो खैर है ही जिंदाबाद। लेकिन, मीनल वैष्णव का इससे जुड़ पाना इतना आसान भी नहीं रहा। वह बताती हैं, ‘आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मुझे फिरोज अब्बास खान के बारे में कुछ पता ही नहीं था। पहले दिन मैं शूटिंग करने पहुंची तो बहुत अनमना सा था उस दिन। अभिनय मेरा ध्येय नहीं है। मुझे इसके कास्टिंग निर्देशक ने इसलिए चुना कि ये मेरे मुख्य काम सामाजिक सेवा का ही विस्तार लगा। फिर मैंने फिरोज साब की फिल्म ‘गांधी माई फादर’ देखी तो मुझे समझ आया कि मैं कितनी सौभाग्यशाली हूं कि मुझे उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिल रहा है। बस उस दिन के बाद से मैंने अपने आपको इस सामाजिक कार्य में नए सिरे से झोंक दिया।’
3 of 6
मीनल वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मीनल राजस्थान के राजसमंंद जिले की रहने वाली हैं। 12वीं तक वहीं पढ़ीं और फिर कुछ अपने मन का करने को घर छोड़कर शहर शहर घूमती रहीं। यात्रा उनके दैनिक जीवन का अंग बन चुका है। मुंबई वह कॉरपोरेट नौकरी करने पहुंची थीं और यहां उनके चेहरे को पहचाना एक कास्टिंग डायरेक्टर ने और करीब करीब जबरदस्ती उन्हें ले जाकर खड़ा कर दिया शूजित सरकार के सामने। ये उनका पहला ब्रेक था। एचडीएफसी बैंक का कमर्शियल। मीनल उस दिन को याद करती हैं तो अब भी चहक उठती हैं, ‘वह जुहू सर्किल है ना वहां मेरे ये बड़े बड़े होर्डिंग लगे हुए थे। इस सर्किल पर अपने होर्डिंग देखने को बड़े बड़े अभिनेता लालायित रहते हैं, लेकिन मुझे तब इसका एहसास नहीं हुआ। तमाम चौराहों, गलियों और नुक्कड़ों पर मेरे पोस्टर लगे। इसके असर का अंदाजा मुझे तब हुआ जब ये मेरे घर तक किसी ने पहुंचा दिए।’
4 of 6
मीनल वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपने बूते कुछ कर दिखाने का सपना लेकर घर से निकली मीनल ने अपने छोटे भाई को भी अपने ही रास्ते पर चलाया। जो वह जीवन में करना चाहता था, वैसा वह कर सके, इसके लिए वह उसे अपने साथ लेकर मुंबई चली आईं। हाल ही में उसकी शादी भी हो चुकी है। मीनल कहती हैं, ‘ये सच है कि भारतीय परिवारों में अब भी लड़कियों को अपने मन का करने की छूट नहीं है। लेकिन स्थिति लड़कों की भी खास अलग नहीं है। मैंने परिवार का विरोध झेला तो सिर्फ इसलिए कि मैं कम उम्र मे शादी नहीं करना चाहती थी। घर छोड़कर मैंने स्वावलंबी होना सीखा। अपनी मर्जी से जीना सीखा। इसे लेकर मेरी तमाम कड़वी यादें हैं, लेकिन अब मैं खुश हूं और अपने धारावाहिक की तरह अब मुझे भी लगता है कि ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’।’
5 of 6
मीनल वैष्णव
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
धारावाहिक ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’ की लोकप्रियता जबरदस्त रही है। यह अपनी तरह का एक ऐसा ज्ञानवर्धक मनोरंजन कार्यक्रम रहा है जिसकी टीआरपी से सैटेलाइट मनोरंजन चैनल वाले धारावाहिक सिर्फ रश्क कर सकते हैं। मीनल श्रीवास्तव की लोकप्रियता मुंबई के मनोरंजन जगत में खूब है। ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’ में उनका किरदार डॉ. स्नेहा माथुर देश के सुदूर इलाकों तक पहचाना जाता है। स्नेहा और मीनल की शख्सियत तकरीबन एक जैसी ही है।