फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा इन दिनों अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में चल रहे हैं। पिछले दिनों निर्माता एआर रहमान पर दिए बयान को लेकर विवादों में फंस गए थे, उन्होंने दावा किया था कि 'जय हो' गाने की रचना एआर रहमान ने नहीं बल्कि सुखविंदर सिंह ने की थी। हालांकि, खुद सुखविंदर सिंह ने उनके दावों का खंडन किया था। अब निर्माता ने फिल्मों में वीएफएक्स के ज्यादा इस्तेमाल करने पर अपनी राय दी है।
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राम गोपाल वर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
राम गोपाल वर्मा ने हाल ही में, कहा कि बड़े बजट की फिल्में बनाने के लिए काफी मात्रा में विजुअल इफेक्ट्स की जरूरत होती है। कभी-कभी वे अपने विजुअल इफेक्ट्स कलाकारों का चयन केवल उनकी फीस के आधार पर करते हैं और इस मामले में वे उस कंपनी की तलाश करते हैं, जो सबसे अधिक कीमत की डिमांड करती है।
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उन्होंने कहा कि चूंकि फिल्म निर्माताओं को पता नहीं है कि वीएफएक्स में क्या होता है, इसलिए वे बस यह मान लेते हैं कि अधिक पैसे लेने वाली कंपनी बेहतर काम करेगी।
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राम गोपाल वर्मा
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आरजीवी ने कहा कि एक प्रसिद्ध निर्देशक ने उनके साथ साझा किया कि उन्हें अपनी फिल्म के एक विशेष सीन को करने के लिए एक वीएफएक्स कंपनी चुननी थी और उनके पास एक कंपनी का चयन था, जो 25 करोड़ रुपये चार्ज कर रही थी और दूसरी कंपनी जो 35 करोड़ रुपये चार्ज कर रही थी।
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राम गोपाल वर्मा
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“निर्देशक ने मुझसे कहा, "सर, मुझे नहीं पता कि इसे बेहतर कौन बना सकता है। दोनों बड़ी कंपनियां हैं। मुझे नहीं पता कि वीएफएक्स प्रक्रिया कैसे की जाती है, मैं उस पर विशेषज्ञ तकनीशियन नहीं हूं, लेकिन सोचने के बाद, हमने 35 करोड़ रुपये की कंपनी के साथ जाने का फैसला किया क्योंकि हमारे पास पैसा था। हालांकि, हनुमान और आदिपुरुष का बजट भी हमें पता है और दोनों फिल्मों की कमाई भी हमारे सामने है। वीएफएक्स पर ज्यादा पैसा खर्च करने से फिल्में हिट नहीं होती हैं।"
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