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Film Review: जो कपिल नहीं कर पाए वो 'फुकरे' में देखिए और मुस्कुराइए

Fri, 08 Dec 2017 02:03 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Fri, 08 Dec 2017 02:03 PM IST
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film review of Fukrey Returns

निर्माताः एक्सेल एंटरटेनमेंट


निर्देशकः मृगदीप सिंह लांबा
सितारेः पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, ऋचा शर्मा, अली फजल, मंजोत सिंह, पंकज त्रिपाठी, राजीव गुप्ता
रेटिंग **


शब्दकोश में 'देजा वू' का अर्थ होता है, पूर्वानुभव भ्रांति यानी ऐसी स्थिति, जिसमें पड़ कर आपको लगे कि इसे पहले भी देखा या अनुभव किया है, 'फुकरे रिटर्न्स' वही है। साल 2013 में आई फुकरे से कनेक्ट यह कहानी एक ही साल की छलांग लेती है। वही किरदार हैं, वही हालात हैं। चूचा (वरुण शर्मा) को अब भी दिन में सपने दिख रहे हैं और हनी (पुलकित सम्राट) सपनों की मनचाही व्याख्या करके लॉटरी के टिकटों का नंबर निकाल रहा है। लाली (मंजोत सिंह) और जफर (अली फजल) टोली के सदस्य हैं। पिछली बार भोली पंजाबन (ऋचा चड्ढा) तिहाड़ जेल पहुंच गई थी, अब वह बाहर निकल आई है। 

film review of Fukrey Returns

उसके बारह सौ धंधे इन फुकरों के चक्कर में पड़ कर साल भर में बर्बाद हो गए। उसे भरपाई चाहिए लेकिन फुकरों के पास नया कुछ नहीं है, वही चूचा है वही उसके सपने और लॉटरी के टिकट हैं। असल में लेखक-निर्देशक ने कुछ नए की कोशिश नहीं की क्योंकि कहानी में जब सिर्फ एक साल की छलांग है तो कितना बदलाव किया जा सकता है?

अगर आपको पिछली फिल्म पसंद थी तो फुकरों की वापसी भी आकर्षित करेगी। यह फुकरे में छूटे हंसी के फव्वारों का एक्सटेंशन है। 'फुकरे रिटर्न्स' की कहानी दिल्ली में हुए अंतरराष्ट्रीय खेलों में मंत्री बाबूलाल (राजीव गुप्ता) के भ्रष्टाचार के सूत्र लेकर आगे बढ़ती है। 

film review of Fukrey Returns

भोली पंजाबन को घाटे की भरपाई के लिए इस बार चूचा-हनी एंड कंपनी ने दिल्ली में छुपे हुए खजाने का रास्ता दिखाया है। खजाना मिल गया तो यह लॉटरी से बड़ी चीज होगी। चूचा को 'देजा वू' हुआ है कि खजाने का रास्ता दिल्ली चिड़ियाघर में बाघिन के जंगल से होते हुए एक गुफा में निकलता है, वहां खजाना है! क्या खजाना मिलेगा क्योंकि दिल्ली जितनी ऊपर है, उतनी ही नीचे बसी हुई है।

फिल्म में वरुण शर्मा, पुलकित सम्राट, ऋचा चड्ढा और पंकज त्रिपाठी अपनी भूमिकाओं में निखर कर आते हैं। वरुण का भोलापन और भोली पंजाबन पर उनका प्यार गुदगुदी पैदा करते हैं। अली फजल की भूमिका सीमित है और मंजोत सिंह की भूमिका स्क्रिप्ट में विस्तार की मांग करती है। 

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film review of Fukrey Returns

पंडित के किरदार में पंकज त्रिपाठी चौंकाते हैं। यह जरूर है कि 'फुकरे रिटर्न्स' की कहानी में पिछली बार की तरह विविधता नहीं है, इसलिए खास तौर पर दूसरे हिस्से में वह खिंचती-सी मालूम पड़ती है। फिल्म में गीत-संगीत की जो गुंजायश निकाली गई है, वह मनोरंजन में इजाफा नहीं करती। नायक-नायिकाओं की तीन जोड़ियां होने के बावजूद रोमांस नहीं है।

कैमरावर्क ठीक-ठाक है और लोकेशन या सेट कुछ नया नहीं दिखाते। अपनी भाषा और कलेवर में यह पूरी तरह से दिल्ली और आसपास के लोगों का सिनेमा है।

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