हिंदी सिनेमा के सबसे शुरुआती और सबसे मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन जॉनी वॉकर को अपने दर्शकों को हंसाना बखूबी आता था। 11 नवंबर को जन्मे इस अभिनेता ने कॉमेडी के बादशाह बनने से पहले एक साधारण परिवार में जन्म लिया था। जॉनी अपनी पतली मूंछों, अनोखी कर्कश आवाज और क्लासिक शराबी हरकतों के लिए जाने जाते थे। आज दिवंगत अभिनेता का जन्मदिवस है, चलिए इस मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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जॉनी वॉकर
- फोटो : एक्स; @FilmHistoryPic
बस कंडक्टर थे जॉनी वॉकर
जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था। उनके परिवार में पंद्रह सदस्य थे। जॉनी वॉकर जब मुंबई आए तो शुरुआत में उन्होंने अपना पेट पालने के लिए बस कंडक्टर का काम किया। इसके लिए उन्हें महीने के 26 रुपये सैलरी मिलती थी। ऐसे में वे बस में लोगों को अपने अदाकारी का नमूना दिखाकर खूब हंसाते थे और उनका मनोरंजन करते थे।
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जॉनी वॉकर
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ऐसे खुला किस्मत का ताला
जॉनी अपने अंदाज में बस यात्रियों का मनोरंजन करते हुए अपना काम करते थे। एक बार बलराज साहनी उसी बस में सफर कर रहे थे और उन्होंने जॉनी का यह टैलेंट देखा और वे प्रभावित हुए। इसके बाद बलराज साहनी ने निर्देशक गुरु दत्त को जॉनी वॉकर के बारे में बताया। उस समय गुरु दत्त अपनी फिल्म 'बाजी' की तैयारी कर रहे हैं। बलराज साहनी ने जॉनी वॉकर को गुरु दत्त से मिलने की सलाह दी। इसके बाद गुरु दत्त के सामने उन्होंने शराबी की एक्टिंग की जो गुरु दत्त को काफी पसंद आई और उन्होंने जॉनी वॉकर को फिल्म 'बाजी' में रोल दिया। इस फिल्म में अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री गीता बाली मुख्य भूमिका में थीं। यहां ये उनकी किस्मत का बंद दरवाजा खुला और इसके बाद जॉनी वॉकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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जॉनी वॉकर
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ऐसे पड़ा नाम - जॉनी वॉकर
जॉनी वॉकर को यह नाम भी गुरु दत्त की वजस से मिला था दरअसल, जब गुरु दत्त ने उनसे शराबी की एक्टिंग करने के लिए कहा और वे इस पड़ाव में पार हो गए तो गुरु दत्त भी प्रभावित हुए। इस दौरान खुलासा हुआ कि अभिनेता ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया है, जिसके बाद गुरु दत्त ने ही उनका नाम मशहूर स्कॉच व्हिस्की ब्रांड जॉनी वॉकर के नाम पर रख दिया, जिसके बाद वे इसी नाम से मशहूर हो गए। सच तो यह है कि वे फिल्मों में शराबी के किरदार में मशहूर हुए, लेकिन फिल्मों में शराब की अदाकारी से लोगों को प्रभावित करने वाले अभिनेता ने असल जिंदगी में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया।
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जॉनी वॉकर
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इन फिल्मों में नजर आए जॉनी
जॉनी अपनी कॉमेडी भूमिकाओं में तो बेहतरीन थे ही, उन्होंने साबित कर दिया कि वे गंभीर भूमिकाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। आनंद (1971) में जॉनी इस्साभाई सूरतवाला की भूमिका में नजर आए। उन्होंने अपने अलग अंदाज से लगभग 4 दशक तक दर्शकों का मनोरंजन किया। जॉनी ने बाजी (1951) में शानदार अभिनय किया और गुरु दत्त ने उन्हें फिल्मों में साथ काम करने के लिए कहा। वास्तव में, जॉनी की कुछ यादगार भूमिकाएं गुरु दत्त की फिल्मों में थीं, जैसे कि सीआईडी (1956) में मास्टर द पिकपॉकेट और थर्स्ट (1957) में मालिश करने वाले अब्दुल सत्तार की भूमिका। फिल्म उद्योग के बाहर गुरु दत्त और जॉनी वॉकर भी बहुत अच्छे दोस्त थे।