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गोंधल: महाराष्ट्र की सदियों पुरानी परंपरा पर बनी फिल्म ने मारी ऑस्कर में एंट्री, जानें क्या है 'गोंधल' रस्म?
Fri, 18 Sep 2026 10:51 PM IST
संदेश मेहरा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: संदेश मेहरा
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:51 PM IST
सार
Marathi film Gondhal: मराठी सिनेमा की फिल्म 'गोंधल' को 2027 में होने वाले 99वें अकादमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है। लेकिन आखिर गोंधल क्या है और महाराष्ट्र में इसका इतना महत्व क्यों है? आइए जानते हैं।
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मराठी फिल्म गोंधल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संतोष दावखर के निर्देशन में बनी फिल्म 'गोंधल' ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़कर अकादमी अवॉर्ड्स में जगह बनाई है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा गोंधल के इर्द-गिर्द घूमती है। विस्तार से जानिए इस परंपरा के बारे में।
क्या है गोंधल?
गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है। इसमें भजन, संगीत, नृत्य और देवी-देवताओं की पूजा शामिल होती है। इस रस्म को आमतौर पर 'गोंधली' समुदाय के लोग करते हैं।
गोंधल में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य किया जाता है। यह रस्म खास तौर पर रात के समय होने वाले आयोजनों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र में शादी जैसे पारिवारिक मौकों पर भी गोंधल का आयोजन किया जाता है।
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इस दौरान ढोल जैसे वाद्य यंत्रों के साथ तुंतुणे, धातु के वाद्य और मशाल या दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। कलाकार गीत और नृत्य के जरिए देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और आखिर में आरती के साथ रस्म पूरी होती है।
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क्या है गोंधल?
गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है। इसमें भजन, संगीत, नृत्य और देवी-देवताओं की पूजा शामिल होती है। इस रस्म को आमतौर पर 'गोंधली' समुदाय के लोग करते हैं।
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गोंधल में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य किया जाता है। यह रस्म खास तौर पर रात के समय होने वाले आयोजनों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र में शादी जैसे पारिवारिक मौकों पर भी गोंधल का आयोजन किया जाता है।
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इस दौरान ढोल जैसे वाद्य यंत्रों के साथ तुंतुणे, धातु के वाद्य और मशाल या दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। कलाकार गीत और नृत्य के जरिए देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और आखिर में आरती के साथ रस्म पूरी होती है।
मराठी फिल्म गोंधल
- फोटो : इंस्टाग्राम @santosh_davakhar
महाराष्ट्र में क्यों खास है गोंधल?
गोंधल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है। महाराष्ट्र में यह लंबे समय से धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों का हिस्सा रहा है। इस रस्म के दौरान पूरा समुदाय एक साथ आता है, पूजा करता है और रातभर संगीत और भक्ति के माहौल में समय बिताता है।
फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उन्होंने इसे ऐसा सामुदायिक आयोजन बताया, जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और जश्न मनाते थे।
गोंधल में ढोल की आवाज, रात का माहौल, दीपक की रोशनी, नृत्य और भक्ति गीत इसे देखने में काफी आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, यह सिर्फ एक रंगीन परंपरा नहीं है, बल्कि इसे निभाने वाले समुदायों के लिए इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।
गोंधल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है। महाराष्ट्र में यह लंबे समय से धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों का हिस्सा रहा है। इस रस्म के दौरान पूरा समुदाय एक साथ आता है, पूजा करता है और रातभर संगीत और भक्ति के माहौल में समय बिताता है।
फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उन्होंने इसे ऐसा सामुदायिक आयोजन बताया, जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और जश्न मनाते थे।
गोंधल में ढोल की आवाज, रात का माहौल, दीपक की रोशनी, नृत्य और भक्ति गीत इसे देखने में काफी आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, यह सिर्फ एक रंगीन परंपरा नहीं है, बल्कि इसे निभाने वाले समुदायों के लिए इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।
मराठी फिल्म गोंधल
- फोटो : इंस्टाग्राम @santosh_davakhar
'गोंधल' फिल्म में क्या है कहानी?
निर्देशक संतोष दावखर ने गोंधल की इस परंपरा को फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है।
फिल्म में इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। सुमन एक अमीर परिवार में शादी के बाद अपनी जिंदगी से परेशान है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।
इसके बाद सुमन की जिंदगी में कई घटनाएं होती हैं और कहानी धीरे-धीरे धोखे, रिश्तों, विश्वासघात और हत्या की साजिश तक पहुंचती है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह एक अहम भूमिका निभाता है।
निर्देशक संतोष दावखर ने गोंधल की इस परंपरा को फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है।
फिल्म में इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। सुमन एक अमीर परिवार में शादी के बाद अपनी जिंदगी से परेशान है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।
इसके बाद सुमन की जिंदगी में कई घटनाएं होती हैं और कहानी धीरे-धीरे धोखे, रिश्तों, विश्वासघात और हत्या की साजिश तक पहुंचती है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह एक अहम भूमिका निभाता है।
मराठी फिल्म गोंधल
- फोटो : इंस्टाग्राम @santosh_davakhar
निर्देशक ने क्यों चुनी गोंधल की परंपरा?
संतोष दावखर खुद बचपन से गोंधल के आयोजन देखते आए हैं। इसी अनुभव ने उन्हें इस परंपरा के आसपास पूरी कहानी बनाने के लिए प्रेरित किया।
अब 'गोंधल' के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। फिल्म के जरिए गोंधल को सिर्फ एक धार्मिक रस्म के तौर पर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति और लोक परंपरा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा जा सकेगा।
ये भी पढ़ें- हनुमान अंश: प्रयागराज के इस घर में क्यों उमड़ रहे हैं भक्त? नीम करौली बाबा से है खास नाता; जानें पूरा मामला
संतोष दावखर खुद बचपन से गोंधल के आयोजन देखते आए हैं। इसी अनुभव ने उन्हें इस परंपरा के आसपास पूरी कहानी बनाने के लिए प्रेरित किया।
अब 'गोंधल' के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। फिल्म के जरिए गोंधल को सिर्फ एक धार्मिक रस्म के तौर पर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति और लोक परंपरा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा जा सकेगा।
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