14 अगस्त को एक नई थ्रिलर सीरीज ‘बोस’ रिलीज हुई है। श्याम बेनेगल की 'द फॉरगॉटन हीरो' से लेकर 'बोस: डेड/एलाइव' तक, नेताजी सुभाषचंद बोस पर पहले भी कई शो और फिल्में बन चुकी हैं। इस बार एक माइक्रो ड्रामा ‘बोस’ दर्शकों के सामने है, इसे बनाने में एआई (AI) तकनीक का भी इस्तेमाल हुआ है।
सीरीज ‘बोस’ में नेताजी का रोल कर रहे अभिनेता जॉय सेनगुप्ता ने अमर उजाला से खास बातचीत की। अभिनेता ने इस बातचीत में नेताजी के प्रेम, उनके भेष बदलने के तरीके और शूटिंग से जुड़ी कई बातें साझा की हैं।
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अभिनेता जॉय सेनगुप्ता ने सीरीज 'बोस' में निभाया सुभाषचंद्र बोस का किरदार
- फोटो : इंस्टाग्राम@ joysengupta97
‘नेता जी के दिखेंगे कई रूप’
नेताजी का नाम सुनते ही दिमाग में सख्त नेता की फोटो सामने आती है। वह यूनिफॉर्म पहने सैल्यूट करते दिखते हैं। लेकिन अभिनेता जॉय सेनगुप्ता कहते हैं कि ये तो सिर्फ एक 'मुखौटा' है। उनका कहना है, 'नेताजी सिर्फ पोस्टरों में दिखने वाले नेता नहीं थे। वह किसी के बेटे, भाई, दोस्त और किसी के प्रेमी भी थे। पर्दे पर किसी की चाल-ढाल की नकल करना आसान है। असली चुनौती उस इंसान को दिखाने की थी जो अपनी जिंदगी में सफलता और नाकामी दोनों से जूझता था। अगर आप उनके अंदर के असली इंसान को बाहर नहीं ला पाए, तो समझो आपका अभिनय फेल है।'
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अभिनेता जॉय सेनगुप्ता ने सीरीज 'बोस' में निभाया सुभाषचंद्र बोस का किरदार
- फोटो : इंस्टाग्राम@ joysengupta97
‘कैसे अंग्रेजों को चकमा देते थे बोस’
अंग्रेजों को चकमा देने के लिए नेताजी ने कई बार अपना रूप बदला। शो की टीम ने इस बात पर सबसे ज्यादा काम किया कि बिना किसी मेकअप आर्टिस्ट के उन्होंने खुद को कैसे बार-बार बदला होगा? इस पर अभिनेता जॉय मुस्कुराते हुए बताते हैं, 'देखिए, जब नेताजी अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर भेष बदल रहे थे, तब उनके पीछे कोई वैनिटी वैन नहीं घूम रही थी। ना ही कोई पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट साथ था। वह अपना मेकअप और भेष खुद ही सेट करते थे। अब आप खुद सोचिए। उस जमाने में बिना किसी मदद के, कोलकाता की कड़क गर्मी और पसीने में कोई अपनी नकली दाढ़ी-मूंछ कैसे संभालता होगा? हमने शो में हीरो जैसा चमचमाता मेकअप नहीं दिखाया है। इसके बजाय हमने सबकुछ रियल रखा है।’
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अभिनेता जॉय सेनगुप्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@joysengupta97
‘कैमरे के सामने अचानक क्यों फूट-फूटकर रो पड़े जॉय’
शूटिंग का एक सीन याद करते हुए अभिनेता जॉय थोड़े भावुक हो गए। बात उस सीन की है जब नेताजी अंग्रेजों से बचकर निकल रहे थे। वे हमेशा के लिए अपना घर और देश छोड़ रहे थे।
जॉय बताते हैं, 'जब वे अंग्रेजों को चकमा देकर अपने बड़े मकसद के लिए निकल रहे थे, तो उन्हें नहीं पता था कि वह कभी जिंदा वापस लौट पाएंगे या नहीं। जब वह अपने माता-पिता, भाइयों और भतीजों को आखिरी बार देख रहे होंगे, तब उनके दिल में क्या चल रहा होगा? इस बात को मैंने बहुत गहराई से महसूस किया। मैं भी तो अपना घर-परिवार छोड़कर मुंबई आया था। सफल होऊंगा या नहीं, टिक पाऊंगा या नहीं, पता नहीं क्या होगा, यह डर और अनिश्चितता तो हम सब के अंदर होती ही है। पर्दे पर भले ही आपको बोलना पड़ता है कि जल्द आजादी दिलाऊंगा। लेकिन अंदर ही अंदर आपकी बाहरी मजबूती और अंदर का डर दोनों एक साथ झलकते हैं। उस सीन को करते वक्त मेरे अंदर का जॉय भी बाहर आ गया था और मैं खूब रोया।'
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अभिनेता जॉय सेनगुप्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@joysengupta97
‘बड़े मकसद के लिए कुर्बान हुई मोहब्बत’
इतिहास में हमेशा नेताजी के त्याग की बात होती है। लेकिन अभिनेता जॉय ने उनकी लव लाइफ पर भी बात की जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं।
जॉय कहते हैं, 'सब जानते हैं कि नेता जी देश से प्यार करते थे। लेकिन अपनी प्रेमिका के साथ जब वह होते होंगे, तब उनके दिल में क्या चल रहा होता होगा? वह जानते थे कि एक बड़े मकसद के लिए उन्हें अपनी मोहब्बत को भी छोड़ना पड़ेगा। त्याग करने पर सब बातें बनाते हैं। लेकिन अंदर के दर्द को सब भूल जाते हैं। जब हम खुद किसी तकलीफ से गुजरते हैं और नहीं चाहते कि हमारा पार्टनर उस तकलीफ को जाने, मैंने इन बातों को पर्दे पर जीया है।'
बता दें कि ‘बोस’ एक माइक्रोड्रामा सीरीज है। इसमें कहानी छोटे-छोटे एपिसोड्स में तेजी से आगे बढ़ती है। जॉय के मुताबिक कम समय में काम करने का दबाव था। लेकिन इसके बावजूद अभिनय से कोई समझौता नहीं किया गया। सीरीज में 1940 के दौर को दिखाने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।